दोहरीघाट। मानसून आने का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है। कटानपीड़ितों को नदी के कहर बरपाने की चिंता सताने लगी है। लेकिन सिंचाई विभाग की तरफ से कटान से बचाव के उपाय तक नहीं किया जा सका है।
घाघरा नदी के कटान से बचाव के लिए विभाग की तरफ से प्रतिवर्ष पानी की तरह बहाया जाता है, लेकिन जून माह में तीन दिन बीत जाने के बाद भी कटान से बचाव के लिए उपाय तक नहीं किया जा सका है।इससे कस्बा का मुक्तिधाम, खाकी बाबा की कुटी, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, डीह बाबा का मंदिर, हनुमान मंदिर,लोक निर्माण का डाक बंगला सहित ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरा मंडराने लगा है। इस संबंध में मुक्तिधाम सेवा संस्थान के प्रबंधक गुलाबचंद गुप्त, नगर व्यापार मंडल अध्यक्ष विनय जायसवाल, दोहरीघाट उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष शिवकुमार जायसवाल, नगर चैयरमैन वेदाना सोनकर का कहना है कि नदी प्रतिवर्ष व्यापक पैमाने पर कहर बरपाती है, लेकिन कटान समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा सका है।
सिंचाई विभाग मऊ के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सरोज का कहना है कि कटान रोकने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट मिलते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।