चिरैयाकोट के जमीन बूढ़ान मुहल्ले में चल रहे श्रीमद् भगवत कथा के सातवें दिन बुधवार को कथा व्यास गंगोत्री महाराज मृदुल ने सुदामा जी के चरित्र का वर्णन किया। सच्ची मित्रता को परिभाषित करते हुए कहा कि सच्चे मित्र के गुण हमें सुदामा और श्रीकृष्ण तथा सुग्रीव और राम की मित्रता से लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सुदामा बहुत ही गरीब ब्राह्मण थे, उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से मित्रता की और भगवान श्रीकृष्ण ने कभी भी अपने मित्र के साथ भेद भाव या ऊंच नीच वाला व्यवहार नहीं किया। मृदुल ने भक्तों का मार्ग दर्शन कराते हुए कहा कि ‘मित्रता जैसा न कोई रिश्ता है, जब जी चाहा छोड़ दिया।’ मिट्टी का नहीं खिलौना यह, जो खेल खेल में तोड़ दिया। श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम के उपरांत वृंदावन धाम से पधारे हुए ब्राह्मणों द्वारा यज्ञ हवन आदि कराया गया। इसके पश्चात भंडारे का आयोजन करके कथा प्रेमियों , श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण के साथ ही भोजन कराया गया। इस कथा में यजमान मार्कण्डेय पाण्डेय व चन्द्रभूषण पाण्डेय, महेंद्र पांडेय, इन्द्रपाल तिवारी, अजय, अमित, विनय, ओमप्रकाश, संजय पांडेय, सिविल कोर्ट जालौन की सिविल जज रश्मि चतुर्वेदी, डा. सुनील कुमार चतुर्वेदी, इन्द्रपाल तिवारी, कृष्ण कुमार चतुर्वेदी, शिव बिहारी तिवारी, अभिमन्यु पांडेय, गायत्री पांडेय, विनय आदि का अहम योगदान रहा।