दुबारी। अमर शहीद कुंवर मुन्नी सिंह तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के स्मृति में क्षेत्र के तिघरा स्थित मां भगवती-भागेश्वरी मंदिर के प्रागंण में चल रही श्रीराम कथा अमृत महोत्सव के अंतिम दिन गुरुवार को कथावाचक पंडित रमेश भाई शुक्ल ने रिश्तों में मधुरता घोलने की प्रेरणा दी। उन्होंने चीन और भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि चीन हमेशा दीवार खड़ने का काम करता है लेकिन भारत सदैव सेतु का निर्माण करता है। इसी प्रकार से मानव को भी दीवार नहीं सेतु बनने का कार्य करना चाहिए।
श्रोताओं को अंतिम दिन कथा का रसपान करते हुए पडिंत रमेश भाई शुक्ल ने कहा कि राम ने पुल बनाकर लंका और भारत को जोड़ दिया था। हम सब को भी कम से कम एक-एक पुल का निर्माण करना चाहिए। उन्होंने रामचरित मानस के लंका कांड का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने रावण को नहीं वरन उसके अंदर के राक्षस का वध किया। इसी प्रकार से लक्ष्मण ने मेघनाद को मारा। मनुष्य को भी अपने राक्षसी प्रवृत्ति को मारना होगा। कहा कि मेघनाद काम का प्रतीक है, कुंभकर्ण अहंकार का प्रतीक है। यह कथा सिखाती है लक्ष्मण जी पहले काम को मारे, संयम पूर्वक भजन करें तब मैं उसके मोह और अंहकार को मार दूंगा। यही तीनों हमारी सुख शांति छीने हुए हैं। राम सुख है सीता शांति। यह तीनों मर जाए तो हमारे ह्रदय के सिंहासन पर सीता राम माने सुख शांति विराजमान हो जाएंगे। यही राम राज्य है। कथा के अंत में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।भंडारे में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य किया। कार्यक्रम के संयोजक प्रधान कुवंर श्याम नारायण सिंह ने आगत अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। साथ ही विशाल कृष्ण शिव मंदिर का निर्माण करने का संकल्प लेते हुए क्षेत्रवासियों से मंदिर में सहयोग के लिए आह्वान किया इस अवसर पर कुवंर कौशल सिंह, पूर्व विधायक नौतनवा बैजनाथ कन्नौजिया, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमित तिवारी, प्रधान राम भवन यादव ,परमा सिंह, श्रीराम, संत विजय सिंह आदि शामिल रहे।