जिले में क्षय रोग (टीबी) के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 303 गांवों को हाईरिस्क श्रेणी में चिह्नित किया है। इन गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाकर संदिग्ध मरीजों की जांच की जाएगी और रोग की पुष्टि होने पर तत्काल उपचार शुरू कराया जाएगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हंसराज सोनी ने बताया कि बीते 24 मार्च से अब तक जिले के 85 गांवों में शिविर लगाकर जांच कराई गई है। इसमें तीन हैंड एक्स-रे मशीनों के माध्यम से तीन टीमों ने 12,541 लोगों की स्क्रीनिंग की।
जांच के दौरान 654 नए टीबी मरीज मिले। इसके साथ जिले में टीबी मरीजों की कुल संख्या 1,801 हो गई है। टीबी के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि जिले की कई ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद नियंत्रण के लिए अभियान तेज कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में पोर्टेबल मशीनों के माध्यम से जांच अभियान चला रहा है। ऐसे लोग, जिन्हें एक सप्ताह से अधिक समय से लगातार खांसी, बुखार या अन्य लक्षण हैं, उन्हें चिह्नित कर जांच की जा रही है।
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सबसे अधिक मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक में मिले टीबी मरीज
मऊ। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 से अब तक मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक में 179 मरीज मिले हैं। इसी क्रम में घोसी ब्लॉक में 162, रतनपुरा में 157, फतेहपुर मंडाव ब्लॉक में 148, रानीपुर ब्लॉक में 166, दोहरीघाट में 92, कोपागंज ब्लॉक में 124 और परदहा ब्लॉक में 55 मरीज मिले हैं।
अब टीबी लाइलाज नहीं है
सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि अब टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। सभी सरकारी अस्पतालों में इसका निःशुल्क उपचार किया जा रहा है। सरकार की ओर से पौष्टिक आहार के लिए आर्थिक सहायता भी दी जाती है। इसलिए यदि किसी को टीबी है तो घबराने की जरूरत नहीं है। समय से उपचार शुरू कर नियमित रूप से दवा लेने से मरीज ठीक हो सकता है। जिले की कई ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित हो चुकी हैं।