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Mau News: गंभीर टीबी के 55 दिन में मिले 30 मरीज, 14 साल से कम उम्र के पांच

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मऊ। जिले में टीबी के गंभीर चरण यानी एमडीआर का ग्राॅफ बढ़ रहा है। बीते वर्ष 365 दिन में जहां 186 मरीज मिले थे, वहीं इस वर्ष के शुरुआती 55 दिन में 30 मरीज मिल चुके हैं। इसमें चौदह वर्ष से कम उम्र के पांच मरीज हैं।
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वहीं बीते दो साल में एमडीआर मरीजों का आंकड़ा करीब 20 फीसदी तक बढ़ा है। इसमें से पांच मरीज ऐसे हैं जो कि प्री एसडीआर श्रेणी में आ चुके हैं। वहीं इस अवधी में 712 नए टीबी के मरीज मिले हैं।
राजकीय टीबी क्लीनिक के आंकड़ों के अनुसार मरीजों की लापरवाही के चलते पिछले कुछ महीने में जिले में एमडीआर टीबी के मरीजों की संख्या तेजी बढ़ी है। बताया गया कि वर्तमान में बीते 25 जनवरी से टीबी खोजी अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें अब तक 712 मरीज टीबी के चिह्नित हो चुके हैं, इससे जिले में कुल मरीजों की संख्या 7000 हो गई।
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बताया कि इसमें बीते जनवरी में 17 तो बीते 24 दिन में 13 ऐसे मरीज मिले हैं जो कि मल्टी ड्रग प्रतिरोधी टीबी (एमडीआर टीबी) संक्रामक से पीड़ित है। इसमें पांच मरीजों की उम्र 14 वर्ष से कम है, इसमें 12 महिला तो 18 पुरूष मरीज है। वहीं एमडीआर मरीजों के आंकड़े देखे तो वर्ष 2024 में 186 तो वर्ष 2023 में 169 जबकि वर्ष 2022 में 166 मरीज मिले थे। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. आरके सिंह ने बताया कि एमडीआर मरीजों के लिए टीबी क्लीनिक में सीबी नेट मशीन लगाई गई है। ताकि एमडीआर टीबी की सही समय पर जांच हो सके।
एमडीआर टीबी से विकलांगता, बहरापन, गुर्दे से संबंधित बीमारियों समेत अन्य कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। पिछले डेढं माह में 30 मरीज आ चुके हैं। बताया कि जनपद में पिछले कुछ महीने से इसके मरीजों की संख्या बढ़ी है, जिसका मुख्य कारण है दवा की उचित मात्रा, दवा की अवधि और दवा के चयन के साथ रोगी की वर्तमान शारीरिक स्थिति है। टीबी रोगी को एंटी टीबी ड्रग देने से पहले यह तय किया जाना बहुत जरूरी होता है कि मरीज को दी जाने वाली दवा उपयुक्त है या प्रतिरोधी है।
बताया कि इन मरीजों को दवा सेवन की सामान्य समय छह माह से 24 महीने का होता है। इसके बीच आराम होने के बावजूद बिना डाक्टर के परामर्श से दवा बंद नहीं करनी चाहिए। एमडीआर टीबी की चपेट से घर में एक के होने पर पूरा परिवार इसकी चपेट में आ जाता है।
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