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जनपद में नहीं खुल सके उच् तकनीकी शिक्षण संस्थान

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आजादी के दशकों बाद भी जिले में इंजीनियरिंग, मेडिकल सहित उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थानों की स्थापना नहीं की जा सकी है। सरकार द्वारा खोले गए तकनीकी संस्थानों की हालत दयनीय है। उच्च शिक्षण संस्थान के अभाव में गरीब छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है। मधुबन तहसील क्षेत्र में राजकीय डिग्री कालेज खोले जाने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से छह माह पूर्व जमीन चयन की रिपोर्ट शासन को भेजी गई। लेकिन अभी तक मामला लटका पड़ा है। लगभग एक दशक पूर्व जिले में कृषि विश्वविद्यालय खोले जाने का प्रस्ताव था, लेकिन शासन स्तर से तकनीकी पेंच दिखाकर उसे गैर जनपद स्थानांतरित कर दिया गया। ऐसे में अब लोकसभा चुनाव में उच्च शिक्षा के मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।
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जिले से प्रतिवर्ष विभिन्न बोर्डो से 30 हजार छात्र 12वीं परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं, उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थानों की स्थापना न होने से छात्र महानगरों की ओर रुख करते हैं। गरीब तबके के छात्र तो आर्थिक तंगी के चलते योग्य होते हुए शिक्षा हासिल नहीं कर पाते। वर्ष 2009-10 में जिले में कृषि विश्वविद्यालय खोले जाने का प्रस्ताव था, लेकिन तकनीकी पेंच दिखाकर गैर जनपद स्थानांतरित कर दिया गया।उच्च शिक्षण संस्थान के नाम पर जिले में दो राजकीय डिग्री कालेज तथा चार सहायता प्राप्त डिग्री कालेज हैं। छात्रों की पहली पसंद राजकीय तथा सहायता प्राप्त कालेजों की होती है। लेकिन इन महाविद्यालयों में सीमित सीटें होने के चलते सभी छात्रों को प्रवेश ही नहीं मिल पाता है। एक ही राजकीय महाविद्यालय में विज्ञान वर्ग की सुविधा है। जबकि कामर्स तथा कृषि वर्ग के लिए जिले के सरकारी महाविद्यालयों में सुविधा ही नहीं है। जबकि तकनीकी शिक्षण संस्थान के नाम पर राजकीय पालीटेक्निक तथा राजकीय बुनाई तथा आटीआई है। यहां भी सुविधाओं का अभाव है। गत वर्ष शासन की तरफ से मधुबन में राजकीय डिग्री कालेज खोलने की घोषणा की गई थी। उच्च शिक्षा अधिकारी ने जिला प्रशासन से प्रस्ताव मांगा था। जिला प्रशासन ने गत वर्ष अक्तूबर 2018 मधुबन तहसील के हृदयपट्टी में भूमि का चयन कर रिपोर्ट भेजी थी, लेकिन इसके बाद प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकी है।
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इस बाबत उपजिलाधिकारी निरंकार सिंह का कहना है कि राजकीय डिग्री कालेज के लिए जमीन चिह्नित कर शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है।
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