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सूरजपुर में दो साल से हो रही कटान

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दोहरीघाट। दो हरियों का मिलन स्थल दोहरीघाट आज अपने दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। हर साल होने वाली कटान के चलते नगर भौगोलिक स्थिति ही बदल गई है।1989 से शुरू हुई कटान लगातार जारी है। अब तक कटान से नगर की अनेक ऐतिहासिक धरोहरें गौरीशंकर मंदिर रामजानकी मंदिर खाकी बाबा की कुटी,नागा बाबा की कुुटी जानकी घाट का अस्तित्व जहां समाप्त् हो गया है, वहीं बची हुई अनेक एतिहासिक धरोहरें मुक्तिधाम, दुर्गामंदिर, लोक निर्माण विभाग का डाकबंगला, शाही महजिद तथा हनुमान मंदिर का अस्तित्व खतरे में है।
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1989 से कस्बे में लगातार कटान जारी है। लेकिन कटान रोकने के लिये स्थाई समाधान अब तक नहीं किया गया है। कटान रोकने के नाम पर अब तक करोडों रूपये खर्च हो चुके हैं लेकिन कटान रोकने का स्थाई समाधान नही हो सका है। यही कारण है कि कटान का खतरा अभी तक बना हुआ है। बरसात शुरू होने में मात्र एक सप्ताह रह गया है लेकिन प्रशासन और सिंचाई विभाग ने कटान रोकने के लिये अब तक कुछ नहीं किया है। मुक्ति धाम सेवा संस्थान के प्रबधक गुलाब चन्द्र गुप्त, काग्रेस के पूर्व व्लाक अध्यक्ष प्रजापति राय, व्यापार मंडल के अध्यक्ष विनय जयसवाल, मुक्तिधाम सेवा संस्थान के कोषाध्यक्ष ब्रजेश गुप्त, भाजयुमो के जिला उपाध्यक्ष पंकज मद्वेशिया ने बताया कि बरसात शुरू होने के पहले कटान रोकने के कोई उपाय नहीं किया गया तो भारी नुकसान होगा।
इस संबंध में अधिशासी अभियंता वीरेन्द्र सरोज का कहना है कि कटान से बचाव के लिए कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजा गया है। बजट मिलते ही कार्य शुरु करा दिया जाएगा।
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