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किराए के भवन में हो रहे हैं 18 आयुर्वेदिक अस्पताल

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मऊ। कोरोना संक्रमण काल में आयुष के प्रति सरकार का रुझान बढ़ा है। इस दौरान आयुष चिकित्सा पद्धति को सरकार ने बढ़ावा देने का काम भी किया, लेकिन जिले में आयुर्वेद चिकित्सा की दशा बहुत की दयनीय है। काफी समय पहले मरीजों का उपचार करने के लिए जिले में आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों की स्थापना तो की गई, लेकिन समय के साथ सुविधाएं मुहैया न होने से दिन प्रतिदिन इनकी दशा दयनीय होती जा रही है।
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जिले के इन 35 अस्पतालों में सृजित पदों के सापेक्ष न तो डॉक्टर हैं और न ही कर्मचारी, अधिकांश अस्पताल तो किराए के भवनों और ग्राम पंचायतों की अनुकंपा पर मिले भवनों में संचालित है। यहां तक कि विभाग के अफसरों को वाहन तक मुहैया नहीं कराया गया, ताकि वे अस्पतालों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्था सुधारने का प्रयास कर सकें।
जनपद में आयुर्वेद के 29 तथा यूनानी के छह अस्पताल स्थापित है। वर्तमान में आयुर्वेद अस्पतालों में 31 चिकित्सकों के सापेक्ष केवल 15 चिकित्सकों की तैनाती है। जबकि छह यूूनानी चिकित्सक के सापेक्ष तीन चिकित्सक है। यानी तीन यूनानी अस्पताल बिना चिकित्सक तथा कई आयुर्वेद अस्पताल चिकित्सक विहिन है। यहीं नहीं इन अस्पतालों में संसाधनों की बहुत कमी है। आयुर्वेद के 29 अस्पताल में केवल 11 अस्पताल ही सरकारी भवन में संचालित हो रहा है, बाकी किराए के भवन में। इसका उदाहरण नगर के पुरानी तहसील स्थित आयुर्वेद अस्पताल से समझा जा सकता है। इस अस्पताल में न तो पर्याप्त चिकित्सक है न ही पर्याप्त संसाधन। पर्याप्त जगह की कमी, डॉक्टर के मौजूद न रहने सहित अन्य असुविधाओं की वजह से मरीजों का रुझान इस अस्पताल की तरफ बहुत कम हो गया है।
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विभागीय कर्मचारी दबे मुंह डॉक्टर घट जाने के कारण कहीं-कहीं चिकित्सा व्यवस्था वहां तैनात फार्मासिस्ट के कंधों पर टिकने की बात स्वीकार कर रहे है। यहीं नहीं राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों में वार्ड ब्वाय और परिचारकों की संख्या भी कम हो गई है। चौंकाने वाली बात है कि क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी के कार्यालय नगर के निजामुद्दीनपुरा मुहल्ले में एक तंग गली में एक छोटे से मकान में संचालित हो रहा है। इस विभाग के पास वाहन तक की सुविधा नहीं मुहैया कराई गई है। नतीजतन अफसरों को अस्पतालों का निरीक्षण करने या अन्य जरुरी कार्यों से आने जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. जयराम यादव ने बताया कि आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने तथा स्थानांतरण की वजह से अधिकांश पद खाली हो गए हैं। उन पदों पर संघ लोक सेवा आयोग से एवं रिटायर्ड डॉक्टरों की पुनर्नियुक्ति के लिए शासन स्तर पर प्रयास शुरू कर दिया गया है। जहां दवाइयां नहीं पहुंची हैं, वहां जल्द उपलब्ध करा दी जाएंगी। जमीन के अभाव में विभागीय अस्पताल नहीं बन पा रहे हैं, जिससे उन्हें किराए के भवनों में संचालित करना पड़ रहा है।
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