मऊ। जिले के नोडल अधिकारी प्रीती शुक्ला ने नगरपालिका सहित जिले के सभी नगर पंचायतों में अभी तक पशु आश्रय स्थल बनाने के लिए फरमान जारी किया था, लेकिन अभी तक मात्र नगरपालिका में ही बनाया जा सका है। वहीं कुछ नगर निकायों द्वारा जहां अभी तक आश्रय स्थल नहीं बनवाए हैं तो वहीं कुछ निकायों द्वारा अस्थाई पशु आश्रय स्थल बनवाकर इत्तीश्री कर रहे है। इससे छुट्टा पशुओं द्वारा फसलों को नष्ट करने और सड़कों पर घूमने से हो रहे हादसे में लगाम नहीं लग पा रही है।
छुट्टा पशुओं के सड़क पर घूमने से दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ रहा है। वहीं इन पशुओं द्वारा किसानों की फसलों को नष्ट कर रहे है। इस समस्या के निस्तारण को लेकर नोडल अधिकारी प्रीति शुक्ला द्वारा जिले के सभी निकायों को पशु आश्रय स्थल बनाने का निर्देश दिया था। लेकिन जिले में केवल नगर पालिका मऊ गायघाट स्थित खाली जगह पर नगर पालिका द्वारा करीब 27 लाख की लागत से पशु आश्रय स्थल बनाया गया है। जिसका उद्घाटन डीएम प्रकाश बिंदु और नपाध्यक्ष तैयब पालकी द्वारा किया गया। वर्तमान में इस आश्रय स्थल में 30 से ज्यादा मवेशी है। वहीं जिले के दूसरी नगर निकाय मुहम्मदाबाद गोहना, वलीदपुर और मधुबन नगर निकाय में अस्थाई आश्रय स्थल बनाने का दावा किया जा रहा है। वहीं कोपागंज, अदरी, चिरैयाकोट, घोसी, अमिला, दोहरीघाट निकायों में नोडल अधिकारी के निर्देश के बाद भी पशु आश्रय स्थल नहीं बनाया गया है। उधर निकायों में पशु आश्रय स्थल नहीं बनने से छुट्टा पशुओं का आंतक बढ़ता जा रहा है। इस बाबत एडीएम डीपी पाल का कहना है कि प्रारंभिक स्थिति में सभी निकायों में अस्थाई पशु आश्रय स्थल बनाया जा रहा है। स्थाई पशु आश्रय स्थल बनाने के लिए सभी निकायों द्वारा जमीन का चिहिन्त करने का कार्य भी अंतिम चरण में है। कहा कि इसके बाद भी निकायों द्वारा आश्रय स्थल नहीं बनाने पर कार्रवाई की जाएगी।