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चौथे दिन की रामलीला में भरत पहुंचे भ्राता को मनाने

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घोसी। नगर पंचायत की रामलीला में चौथे दिन भरत अपने बड़े भाई प्रभु श्रीराम को मनाकर वापस लाने के लिए चित्रकुट रवाना होते है। काफी लोगों के साथ भरत को आता देख वनवासी प्रभु के पास आकर कहता है। कि प्रभु एक बहुत बड़ी सेना इसी तरफ आ रही है, और पता नही कहां से आ रही है, और पता नही कहां तक जाएगी।
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यह सुनकर लक्ष्मण जी क्रोधित हो उठे ते है।इस पर भगवान श्री राम ने कहा कि हे लक्ष्मण भरत तो धर्म का सूर्य है। जो कभीगलत कार्य नही कर सकता ।इसी के साथ भरत शत्रुघ्न और गुरूदेव के साथ राम के पास पहुंच कर राम को अयोध्या ले जाने का प्रयत्न करते है। इस अनुनय विनय किया तो राम ने कहा कि हे भरत पिता की आज्ञा मानकर मै वन को आया मै उस संकल्प को कैसे तोड़ दूं। यहां चारों भाईयों के प्यार को देख दर्शक रो पड़े। प्रभु के न मानने पर भरत ने तपस्वी के रुप में जीवन यापन करने तथा प्रभु की चरण पादुका को लेकर अयोध्या वापस होते है।मार्मिक दृश्यदेखकर सभी नगरवासी भाव विभोर हो उठे और जय श्री राम तथा भरत लाल की जय के नारों से पूरा नभ मंडल गुंजायमान हो गया। कार्यक्रम में रामविलास सोनकर, उमेश मिश्रा, जनक बरनवाल, वायु नंदान मिश्र, रामधारी सोनकर,नरेन्द्र वर्मा, पंकज पाण्डेय, पुनीत मिश्रा, उद्देश्य पाण्डेय, नन्दनपाण्डेय, अंकित मिश्रा, नितिन मिश्रा, छात्र नेता अतुल शर्मा, आदि लोग उपस्थित रहे।
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