रेल महकमा रेल सुविधा बेहतर होने को लेकर चाहे लाख ढिढोरा पीटे लेकिन मऊ शाहगंज रेल प्रखंड पर यात्री सुविधाओं का घोर अभाव है। दिन में यात्रा को लेकर पूरे 12 घंटे तक इस रेलमार्ग पर एक भी पैसेंजर ट्रेन न होने से यात्रियों को काफी असुविधा होती है।जेब ढीली होने के अतिरिक्त यात्रा में लगने वाला समय काफी कष्टकर होता है।
मऊ शाहगंज रेल प्रखंड पर पैसेंजर गाड़ियों का काफी अभाव है। पूरे दिन लगभग 12 घंटो तक किसी भी दिशा में एक भी यात्री गाड़ी न होने से मऊ और शाहगंज के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। जहां तक पैसेंजर गाड़ी की सुविधा का प्रश्न है तो सुबह 5 बजे आजमगढ़ से चलकर वाराणसी तक जाने वाली तमसा सवारी गाड़ी के दो घंटे बाद ही शाहगंज से चलकर बलिया तक के लिए एक सवारी गाड़ी मिलती है। इसके बाद पूरे दिन शाहगंज से मऊ के बीच एक भी सवारी गाड़ी नहीं है। इसी प्रकार मऊ से शाहगंज के लिए सुबह 8 बजे एक पैसेंजर गाड़ी के बाद शाम 8 बजे यानी पूरे 12 घंटा तक दिन में एक भी गाड़ी नही है । मऊ शाहगंज रुट पर ही आजमगढ़ कमिश्नरी मुख्यालय स्थित है। बलिया मऊ और आज़श्मगढ़ जनपदो से मंडल मुख्यालय तक रोजाना सैकड़ो लीग यात्रा करते है लेकिन ट्रैन सुविधा न होने से खासकर गरीब व माध्यम वर्ग के लोगो को काफी आर्थिक नुकसान सहना पड़ता है। इस रूट पर दिन में दो जोड़ी सवारी गाड़ी चलाये जाने की मांग सालों से की जा रही है लेकिन रेलवे अधिकारियों द्वारा इस मांग पर कोई ध्यान नही दिया गया है। इस बाबत रेल संघर्ष समिति के संयोजक बीरेंद्र तिवारी का कहना है कि रेल अधिकारियों के स्थानीय निरीक्षण के दौरान कई बार मांग पत्र दिया जा चुका है लेकिन कोई परिणाम नही निकला। कहा कि सरकार का रेल महकमा में विकास का दवा पूरी तरह से फेल है। इस बारे में पूछे जाने पर स्थानीय स्टेशन अधीक्षक आरआर विद्यार्थी का कहना है कि रेल चलाये जाने का निर्णय रेल अधिकारियों और मंत्रालय के अधीन है। इस मांग के संबंध में जो कुछ भी पत्र मिलेगा उसे मुख्यालय भेज दिया जाएगा। सुभाष यादव