जिले में मौजूद 21 पशु आश्रय स्थलों की दशा काफी खराब है। सरकार द्वारा पशुओं के भरण पोषण के लिए दी जा रही धनराशि इन पर खर्च नहीं की जा रही है। यही वजह है कि पशुआश्रय स्थलों पर रखे गए गोवंश मर रहे हैं। जल्दी ही रतनपुरा स्थित पशु आश्रय स्थल में कई गोवंश चारा और पानी के अभाव में मर गए। जिले की अन्य पशुशालाओं की हालत काफी खस्ता है। इन पशुओं को पानी, चारा और छाजन के लिए एक करोड़ 20 लाख रूपए प्रदेश सरकार से मिले हैं लेकिन विभाग आधी रकम ही खर्च कर सका है। स्थिति यह है कि धूप और गर्मी में पशु चारे के संकट से जूझते हुए मर रहे हैं।
शासन से इन आश्रय स्थलों के निर्माण के लिए 1.20 करोड़ रुपये मिले थे। जिले में कुल 21 पशु आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इनमें 945 गोवंश इन आश्रय स्थलों में हैं। इनके भरण पोषण के लिए एक करोड़ रुपये मिले हैं। नगर पालिका में 64 पशु रखे गए हैं। नगर पंचायत में पांच, अमिला नगर पंचायत में पांच, घोसी नगर पंचायत में 15, दोहरीघाट नगर पंचायत में 13, मुहम्मदाबाद गोहना में 10 वलीदपुर नगर पंचायत में 23, मधुबन नगर पंचायत में 17 , चिरैयाकोट नगर पंचायत में 10 पशु रखे गए हैं। इस प्रकार नगर पालिका सहित नौ नगर पंचायतों में केवल 169 पशु ही पशु आश्रय केंद्रों में रखे गए हैं। कोपागंज नगर पंचायत में एक भी पशु नहीं हैं। जबकि इसके विपरीत
परदहा ब्लाक के रणवीरपुर में150 गोवंश, सरयां में114 गोवंश, फतेहपुर मंडाव ब्लाक के केशव पुर सुल्तानीपुर में 22 पशु , दरगाह में 61 गोवंश,चंद्रापार में 101 गोवंश घोसी ब्लाक के मझवारा में 28 गोवंश, रानीपुर ब्लाक के मिर्जापुर में 60 पशु मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक के कुतुबपुर धनोवा में 38 पशु रखे गए हैं। रतनपुरा में सर्वाधिक180 गोवंश रखे गए हैं। इस प्रकार ग्रामीण क्षेत्र के पशु आश्रय स्थलों पर कुल 776 गोवंश रखे गए हैं। दो सप्ताह पूर्व यहीं से 15 गोवंश लापता हो गए थे। शिकायत की गई कि अपेक्षित चारा के अभाव में ये गोवंश मर गए। यहां पर पशु आश्रय स्थल भी अधूरा है। विभागीय अधिकारियों का कहना था कि ये गोवंश अधूरी चहारदीवारी के चलते भाग गए। इन पशु आश्रय स्थलों में पशुओं की देख रेख के लिए सफाई कर्मियों को लगाया गया है। लोगों का आरोप है कि पशु आश्रय स्थलों में सीमेंट सीट वाले कमरों में रखे गए पशु इस भीषण गर्मी में बेेहाल है। इन्हें संतुलित आहार नहीं दिया जा रहा है। सूखा भूसा से उन्हें पेट भरना पड़ रहा है।