मऊ। देश को टीबी मुक्त बनाने की मुहिम सरकार ने उठा ली है। बावजूद इसके जिले में टीबी के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। बीते वर्ष जितने मरीज मिले थे, इस वर्ष करीब उतने मरीज आठ माह में चिन्ह्ति किए जा चुकें हैं। जबकि मऊ नगर क्षेत्र में अब तक दोगुने मरीज मिल चुके हैं। वर्ष 2017 में मऊ शहर क्षेत्र में में टीबी से ग्रसित मरीजों की संख्या 296 थी, जबकि इस वर्ष आठ माह में ही दन मरीजो की संख्य 462 पहुंच गई है। स्थिति यह है कि वर्ष 2014 में जहां ऐसे रोगियों की संख्या मात्र 25 थी। वहीं 2018 में बढ़कर 140 हो गई है। अभी मरीजों को ढूंढने के लिए अभियान जारी है, जिसके तहत आंकड़ों में इजाफा भी संभव है।
टीबी डॉट्स केंद्रों के आंकड़ों की माने तो मऊ में हर माह 50 से ज्यादा टीबी के मरीज मिल रहे है, जबकि ग्रामीणांचल से यह ग्राफ औसतन 30 मरीजों का है। विशेषज्ञ इसकी वजह जागरूकता की कमी होने के साथ शहरी परिवेश में कम जगहों ज्यादा लोगों के रहनेे के साथ दूषित माहौल और खानपान को रोग का कारण मान रहें हैं। जिले के डॉट्स सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक 2016 में जिले में टीबी के कुल मरीजों की संख्या 2029 पंजीकृत की गई थी। जिसमें मऊ शहर में टीबी मरीजों की संख्या 416 थी, जबकि इसके अलावा घोसी में 330, रतनपुरा में 241 मरीज चिन्हित किए गए थे। वहीं 2017 में जिले में मरीजों की संख्या 2635 थी। इसमें मऊ शहर में मरीजों की संख्या 296 थी, जबकि घोसी में 196 और रतनपुरा में 106 मरीज चिन्ह्ति किए गए थे। इसीक्रम में इस वर्ष 2018 में 10 सितंबर तक जिले में कुल मरीजों की संख्या 2509 चिन्ह्ति की जा चुकी है। जिसमें मऊ शहर में मरीजों की संख्या 462 तो घोसी में 257 और रतनपुरा में 86 मरीज चिन्ह्ति किए जा चुके है। यहीं नहीं जिले में एमडीआर-टीबी रोगियों की संख्या में साल दर साल वृद्धि हुई है। स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है।
समय-समय पर चलने वाले अभियान से जागरूक होकर लोग अस्पताल पहुंचे है, जिससे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। वर्तमान में टीबी खोजो अभियान के तहत 2 लाख 39 हजार 369 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें 93 मरीजों में टीबी की पुष्टी हुई है। -डॉ. एसपी अग्रवाल, डिस्ट्रिक्ट टीबी ऑफिसर
जागरूकता में कमी से फैल रही है टीबी
मऊ। ग्रामीण क्षेत्रों के सापेक्ष शहरी क्षेत्रों में टीबी मरीजों की बढ़ती संख्या पर डिस्ट्रिक्ट टीबी ऑफिसर के डॉ. एसपी अग्रवाल का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खुला परिवेश और गदंगी कम होना है। वहीं शहरी क्षेत्रों के अधिकांश मोहल्लों में सघन आबादी है। जहां आस पास गंदगी होने और खुला वातावरण न होने के अलावा जीवन स्तर निम्न मानक के अनुसार नहीं है। इससे ऐसे जगहों पर रहने वाले लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। लिहाजा टीबी के जीवाणु ‘माइकोबैक्टिरियम ट्यूबरकुलोसिस’ आसानी से यहां के लोगों को अपना शिकार बना रही है। इसके अलावा दूसरा मुख्य कारण जागरूकता की कमी है।
एक मरीज औसतन करता है दस को बीमार
मऊ। टीबी ऐसी बीमारी है, जिसके जीवाणु मरीज के सास लेने पर वातावरण को दूषित करते है, साथ ही हवा के जरिए ये दूसरे को संक्रमित करते हैं। इस तरह से टीबी रोग से ग्रसित एक मरीज औसतन दस लोगों को बीमार करने का काम करता है। इसका उपचार समय से रोग की जानकारी कर उसका निराकरण कराना है। टीबी रोगी के रहन-सहन और कपड़ा खाना पर परिवार के सदस्यों को विषेश ध्यान देने की जरुरत हैं।