मऊ। रोडवेज डिपो में 30 फीसदी चालक और परिचालकों के पद रिक्त पड़े हैं, जिससे हर दिन 15 बसों का संचालन हो ही नहीं पा रहा। इससे डिपो को प्रत्येक माह 50 लाख रुपए से अधिक का राजस्व घाटा हो रहा है। हालत यह है कि जिले के विभिन्न रूटों पर बसें दौड़ाने का जिम्मा महज 70 फीसदी बचे कर्मचारियों के कंधों पर आ गया है। इससे कर्मचारियों के साथ ही इन रूटों के यात्रियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जिला मुख्यालय स्थित उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के मऊ रोडवेज डिपो में 55 बसों को बेड़ा है। इसमें नई बसें आने के बाद यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन डिपो में चालक-परिचालकों की कमी ने बसों के संचालन पर ही ग्रहण लगा दिया है। डिपो में चालकों के 29 और परिचालकों के 28 पद खाली पड़े हैं। चालकों की कमी के कारण अब हर रोज गोरखपुर रूट, बलिया रूट की 15 बसों का संचालन ठप है।
सूत्र बताते हैं कि 55 बसों के संचालन के लिए 119 चालक और 119 परिचालक की तैैनाती होनी चाहिए। लेकिन कई माह से चालकों और परिचालकों की कमी चल रही है। वर्तमान में केवल 90 चालक और 91 परिचालक हैं। इसके चलते पिछले कई माह से स्थानीय परिवहन विभाग द्वारा 55 बसों में केवल 40 बसों का ही संचालन किया जा रहा है। जबकि शेेष 15 बसें रोडवेज परिसर में खड़ी रहती है। इन बसों का संचालन नहीं होने से विभाग को प्रतिदिन लगभग 30 से 40 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है, जो महीने में 50 लाख रुपये के करीब पहुंच जा रहा। वहीं यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।