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आस्था व विश्वास का प्रतीक है प्राचीन गौरीशंकर मंदिर

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कोपागंज। कस्बा स्थित प्राचीन गौरीशंकर मंदिर लोगों में आस्था व विश्वास का प्रतीक आज भी बना हुआ है। यहां महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है। मंदिर को सजाने संवारने की तैयारी जोरों पर चल रही है।
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पिथौरागढ़ नरेश द्वारा लगभग 700 वर्ष पूर्व बनवाया गया था। यहां लोग झूठी कसमें खाने से डरते हैं। महाशिवरात्रि के दिन नगर के अलावा दूर-दूर के भक्त्तों द्वारा जल चढ़ाने तथा पूजा पाठ के लिए अलसुबह से देर रात तक तांता लगा रहता है। किवदंती के अनुसार राजा पिथौरागढ़ कुष्ठ रोग से पीड़ित थे और तीर्थयात्रा पर निकले थे। वर्तमान समय में जहां कोपागंज क़स्बा बसा है वहां जंगल था। इसी जंगल में एक डबरा के किनारे उन्होंने अपना डेरा डाल दिया। सुबह शौच आदि के बाद उन्होंने इस डबरा में नहाने लगे। नहाते वक्त उनको यह अहसास हुआ की उनका कुष्ठ रोग ठीक हो रहा है। रात्रि में उनको स्वप्न में डबरा के अंदर शिवलिंग दिखाई दिया। राजा पिथौरागढ़ ने अपने राज्य पिथौरागढ़ से धन मगाकर इस मंदिर का निर्माण कराया। इस मंदिर की एक विशेषता यह है की इसका गर्भ गृह हर मौसम में वातानुकूलित रहता है। मंदिर की देखरेख करने वाले चंदमौली गिरी ने बताया कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है। कोई भी भक्त बाबा के दरबार से आजतक खाली हाथ नहीं लौटा है।
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