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सरकारी योजनाओं से भ्रष्टाचार का बोलबाला

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पहसा। सरकार के रहनुमा भले ही भ्रष्टाचार मुक्त शासन-प्रशासन के दावे करें पर सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार का वर्चस्व कायम है। तहसील हो अथवा ब्लाक या थाने नियम से काम कराने मे महीनों लग जाते हैं। लेकिन सुविधा शुल्क देते ही काम में तेजी आ जाती है। जिले के कई सरकारी विभागों में बिना लेन देन के कोई काम आगे नहीं बढ़ता है।
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क्षेत्र के प्रदीप तिवारी राजयोगी कहतें है कि विभागों में बिना रुपयों के कोई काम होना मुश्किल है। कहते हैं कि आम आदमी भी झंझट से मुक्ति के लिए शार्टकट अपनाता है। ऐसे में भ्रष्टाचार की जड़ को उखाड़ना संभव नहीं होता। इसी क्रम में विनोद सिंह कहतें है कि आला अधिकारियों के सामने ही भ्रष्टाचार हो रहा है और वे मौन हैं। उनका कहना है कि तहसील व कार्यालयों में दस रुपये का स्टांप लेने पर पंद्रह रुपये देने पड़ते हैं। आय ,जाति निवास भी सरकारी फीश पर कभी नहीं बन पाते । 20 रुपये के स्थान पर दो सौ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। छुटभैये नेता विभागों पर अपना सिक्का चलाते हैं। लेकिन सुनवाई कही नहीं हो रही।

15 रुपये की खतौनी 20 रुपये में
पहसा। तहसील मुख्यालय स्थित कंप्यूटरीकृत खतौनी की नकल की सरकारी फीश 15 रुपये है लेकिन यहां खुले आम 20 रुपये वसूले जाते हैं। कई बार इसकी शिकायत अधिकारियों से की गई परंतु इस पर कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि तहसीलदार मिथिलेश कुमार त्रिपाठी का कहना है कि कंप्यूटर से निर्धारित दर 15 रुपये ही फीश लेने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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शौचालय का हाल बेहाल
पहसा। शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये सरकारी अनुदान दिया जा रहा है।इसके लिए ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा शौचालय निर्माण के बाद मात्र 10 हजार के चेक थमा दे रहे हैं। कई लाभार्थियों की ऐसी शिकायतें आ रही हैं।

प्रधानमंत्री आवास का हाल
पहसा। प्रधानमंत्री आवास योजना में हर जगह पात्रों से वसूली की शिकायतें आ रही है। दर्जनों पात्रों ने आवास के नाम पर 20 से 30 हजार रुपया तक की वसूली की शिकायतें होती हैं। हालांकि सीडीओ की तरफ से चेतावनी दी गई है कि कोई भी रुपये मांगे तो शिकायत करें, कार्रवाई की जाएगी। लेकिन न कोई शिकायत होती है और न ही कार्रवाई ही।

आवासों के लिए धन वसूली की कोई शिकायत उन तक नहीं आई है। ऐसी शिकायत मिलने पर एक ग्राम प्रधान के विरुद्ध एफआईआर तक दर्ज कराई जा चुकी है। आशुतोष कुमार द्विवेदी , सीडीओ मऊ
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