जिले के विभिन्न इलाकों में गुरुवार को कहीं बूंदबांदी तो कहीं बारिश हुई। मौसम मेें आए बदलाव से किसानों को फसल नुकसान की चिंता सताने लगी है। उधर, बदली और बूंदाबांदी के साथ हवाएं चलीं तो खुशनुमा हुए मौसम ने लोगों को गर्मी से राहत भी दिया।
बुधवार को तेज धूप रहने से गर्मी मौसम शुरू होने का अहसास होने लगा था। गुरुवार को तड़के से ही आकाश में बादल छाए रहे। दोपहर में जिले के विभिन्न इलाकों में बूंदबांदी हुई। मौसम में परिवर्तन होने से खेती किसानी पर संकट गहराने लगा है। किसानों को फसल नुकसान होने की चिंता सताने लगी है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो गेहूं की फसल में दाना लग गया है। आम में बौर लग गया है। तेज हवा के साथ बारिश होने की स्थिति में फसल गिर सकती है। आम के बौर में झड़ सकता है। इससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
किसान जयप्रकाश यादव, जर्नादन राय का कहना है कि बारिश होने की स्थिति में गेहूं की फसल गिर सकती है। आम का बौर भी झड़ सकता है। इसी क्रम में संजीव वर्मा, नारायण प्रसाद का कहना है कि फसल में लगने के समय से ही प्राकृतिक आपदा शुरू हो गई है। यही स्थिति रही तो फसल घर पहुंचना मुश्किल ही लग रहा है।पिपरीडीह संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में कहीं बूंदबांदी तो कहीं बारिश हुई। गत माह तेज बारिश के चलते फसल गिर जाने से काफी नुकसान हुआ था। अब एक बार फिर मौसम में बदलाव होने से किसान के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी है। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार का कहना है कि हवा के साथ बारिश होने की स्थिति में फसल गिर सकती है। इससे फसल उत्पादन पर असर पड़ सकता है।