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संतों की वाणी अनमोल एंव अमिट

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रतनपुरा। स्थानीय ब्लाक क्षेत्र के मड़ैली बढ़नपुरा में बाबा जय गुरुदेव के जन्मदिन पर चल रहे संत समागम के पांचवें दिन जय गुरुदेव के परम शिष्य रतन जी महाराज ने कहा कि शरीर में सुधार एवं जीवन के उद्धार के लिए सद्गुरु का होना परम आवश्यक है। परिवार समाज राष्ट्रीय एवं विश्व में शांति अमन और खुशहाली के लिए जय गुरुदेव के बताए रास्ते पर चलना आवश्यक है। संतों की वाणी अनमोल एवं अमिट होती है।
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कहा कि संतों का वचन उद्धार एवं शांति का मार्ग प्रशस्त करता है आज आवश्यक है कि हम शाकाहारी बनें, हम सदाचरण करें, हम नशे से दूर रहें और जीवन जीते हुए विश्व कल्याण के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि हम जिसे पैदा नहीं कर सकते उसे नष्ट करने का भी हमें कोई अधिकार नहीं है। हमें जीवों पर दया करनी चाहिए। आज जो लोग जीवों पर हिंसा करते हैं। जीवों का भक्षण करते हैं और संपूर्ण सृष्टि के लिए एक गंभीर खतरा हैं। इसलिए शाकाहारी बनकर नशे का त्याग करके ही हम अपना उद्धार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जाति धर्म और मजहब में बटकर आज जो कुछ भी हो रहा है वह ठीक नहीं है। सभी मानव एक समान हैं। आज कलियुग जिसमें पापाचार, अनाचार का वातावरण है। यह सब कुछ उस दिन समाप्त हो जाएगा, जिस दिन बाबा जय गुरुदेव के बताए रास्ते पर चलकर हम नशे से दूर रहकर शाकाहारी बनकर सदाचरण करेंगे।
उधर स्थल पर बसे अस्थाई नगर में हर तरफ हर्ष का वातावरण था। सभी अपने गुरु के जन्मदिन खुशी मना रहे थे। यही कारण था कि घंटों लाइन में खड़ा होकर वह दर्शन के लिए अपने बारी की प्रतीक्षा कर रहे थे।
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