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एसएनसीयू में पांच माह में भर्ती हुए दो बच्चे

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मऊ। जिला महिला अस्पताल में अव्यवस्था का बोलबाला है। आठ बेड के एसएनसीयू वार्ड में मार्च माह 2018 से 29 अगस्त 2018 तक केवल दो बच्चे को भर्ती कराया गया। जनवरी माह से दो मार्च 2018 तक 61 बच्चों को भर्ती कराया गया था। ऐसे में एसएनसीयू में दो के सापेक्ष एक चिकित्सक सहित आठ स्टॉफ नर्स की तैनाती है। शिकायत के बाद भी अधिकारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
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बताते चले कि महिला जिला अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिलाओं के प्रसव के बाद गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज के लिए मार्च 2017 में 32 लाख की लागत से अस्पताल में 12 बेड का एसएनसीयू वार्ड स्वीकृत किया गया। लेकिन जगह के अभाव में इस वार्ड में केवल 8 बेड ही शिफ्ट किए गए। एसएनसीयू वार्ड बनने के बाद मार्च 2017 से दिसबंर 2017 में 119 गंभीर रूप से बीमार बच्चों का उपचार किया गया। वहीं 2018 के शुरुआती दो महीनों जनवरी और फरवरी में 61 बच्चों को भर्ती कर उपचार किया गया। लेकिन 2 मार्च से 29 अगस्त 2018 के बीच दो महिला मरीज रजनी जायसवाल की नवजात बच्ची को 3 अगस्त और 4 अगस्त को पिंकी चौहान के नवजात शिशु को भर्ती किया गया। जबकि अगस्त माह में अस्पताल में 62 महिलाओं का प्रसव कराया गया था। वहीं जुलाई माह में 42 और जून माह में 25 गर्भवती महिलाओं का प्रसव हुआ। सूत्रों के अनुसार इनमें कई बच्चें गंभीर रूप से बीमार थे, लेकिन जिम्मेदार डाक्टर की लापरवाही के चलते परिजन उसे अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराने के बजाए निजी अस्पताल में भर्ती कराया। यह स्थिति उस समय हैं जब वार्ड को संचालित करने के लिए एक महिला चिकित्सक सहित 8 नर्सो की तैनाती है।दस एनएससीयू पर हर माह शासन लाखों की राशि व्यय कर रहा है। इस बावत मुख्य चिकित्साधिकारी डा. सतीशचंद्र सिंह का कहना है कि बीच में डाक्टरों की तैनाती के चलते वार्ड में बच्चें भर्ती नहीं हो पा रहे है। हांलाकि एक डाक्टर की तैनाती की जा चुकी हैं, फिर भी भर्ती बच्चों की संख्या कम हैं तो इस बारे में जानकारी ली जाएगी।

दो डाक्टरों के इस्तीफे से चरमराई व्यवस्था
मऊ। बताते चले कि एसएनसीयू वार्ड में पहले तैनात डा. एसएन राय और मनोज गुप्ता ने तत्तकालीन सीएमएस डा. माधुरी सिंह पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए मार्च 2018 में इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद दो माह तक एसएनसीयू वार्ड डाक्टर विहीन हो गया था। अमर उजाला द्वारा इस संबंध में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित करने के बाद जून माह में नवजात शिशु विशेषज्ञ डाक्टर की तैनाती की गई। लेकिन डाक्टर की लापरवाही और उदासीनता के चलते वार्ड में बच्चे भर्ती नहीं हो रहे है और लोगों को अपने बच्चों को बाहर के अस्पताल में भर्ती करनला पड़ रहा है।
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