मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर एक आदिल आफताब अहमद ने हत्या और दहेज हत्या के मामले में सुनवाई के बाद नामजद चार आरोपियों में तीन को दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद तीनों को आजीवन कारावास की सजा के साथ ही प्रत्येक पर एक लाख 56 हजार रुपया अर्थदंड भी निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर दोषी पाए गए लोगों को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं अर्थदंड जमा हो जाने पर उसमें से 80 प्रतिशत राशि मृतका के पिता रामविजय को देने का आदेश दिया। वही एक आरोपी धनेश राम को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। मामला चिरैयाकोट थाना क्षेत्र का है।
मामले के अनुसार वादी मुकदमा रामअवध की भतीजी अमृता की शादी 29 मई 2008 को चिरैयाकोट थाना क्षेत्र के अमरसेपुर गांव निवासी रमेश राम पुत्र नगीना राम के साथ हुई। वादी का आरोप है कि अमृता को उसके ससुराल वाले दहेज के लिए 16 जून 2012 को जलाकर मार डाले। वादी की तहरीर पर पति रमेश राम, तथा देवर गनेश राम, धनेश राम तथा ससुर नगीना राम पुत्र विश्वनाथ को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी श्रीप्रकाश यादव ने कुल आठ गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने तथा केस डायरी का अवलोकन करने के बाद आरोपी रमेश राम, गनेश राम और नगीना राम को हत्या, दहेज हत्या, प्रताड़ना और दहेज की मांग करने के मामले में दोषी पाया।
एडीजे ने अपने निर्णय में लिखा कि मृतका को प्रताड़ित कर जलाकर हत्या कर दिया गया। दोषियों की दहेज लोलुपता तथा उनके विचार एवं कार्य पाश्विक है। उनके कृत्यों से समाज की शांत आत्मा आहत हुई है। समाज में ऐसे क्रूर तत्व अब भी विद्यमान है। कठोर दंड से ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाना अति आवश्यक है। कि समाज में इन जैसे से तत्वों को एक पाठ मिल सके। ताकि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो। दहेज की मांग की प्रवृत्ति को विधि के भय से समाप्त किया जा सके। अन्यथा समाज में न जाने कितनी ही नवविवाहिताओं को अपनी आहूति देनी पड़ेगी। एडीजे ने दोषी पाए जाने के बाद तीनों को हत्या और दहेज हत्या में आजीवन कारावास की सजा के साथ ही प्रत्येक पर तीस- तीस हजार रूपया अर्थदंड निर्धारित किया। वही प्रताडना के मामलें में तीनों को दो- दो वर्ष की सजा के साथ ही पांच- पांच हजार रूपया अर्थदंड निर्धारित किया। साथ ही धारा तीन दहेज प्रतिषेध अधिनियम में तीनों को सात- सात वर्ष का सश्रम कारावास के साथ ही प्रत्येक पर एक लाख 20 हजार रुपया अर्थदंड भी निर्धारित किया। धारा चार दहेज प्रतिषेध अधिनियम में तीनों को सात- सात माह की सजा के साथ ही प्रत्येक पर एक-एक हजार रुपये अर्थदंड निर्धारित किया।