मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी (बाएं) और उनके भतीजे मन्नू अंसारी (दाएं)।
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उत्तर प्रदेश की मऊ सीट पर 1996 से लगातार विधायक बनने वाले मुख्तार अंसारी इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। वह बांदा जेल में बंद हैं। लेकिन लंबे समय से सियासी धमक रखने वाले अंसारी परिवार की नई पीढ़ी से दो उम्मीदवारों ने उनके बाहुबल को साबित करने में जुटे हैं। बेटे अब्बास अंसारी सपा के साथ गठबंधन में शामिल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं और फिलहाल मऊ सीट से निर्णायक बढ़त ले चुके हैं। इतना ही नहीं मुख्तार के भतीजे मन्नू अंसारी भी सपा के टिकट पर मोहम्मदाबाद सीट से मुकाबले में हैं और जीत की ओर अग्रसर हैं।
मुस्लिम बहुल इस सीट पर मुस्लिमों के साथ अनुसूचित जाति का गठजोड़ मुख्तार अंसारी के सिर पर जीत का सेहरा सजाती रही है। वे मऊ सीट से लगातार चार बार से विधायक रहे। उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव में सुभासपा के महेंद्र राजभर को 10 हजार से कम मतों से हराया था। लेकिन इस बार उनकी जगह उनके बेटे अब्बास अंसारी उतरे। यहां बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर और भाजपा के अशोक कुमार सिंह मैदान में हैं। अब्बास अंसारी इससे पहले 2017 में घोसी विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
इसी तरह अब्बास के चचेरे भाई मन्नू अंसारी मोहम्मदाबाद सीट से सपा के टिकट पर मैदान में उतरे और जीत की ओर अग्रसर हैं। उन्हें दो बार इस सीट से विधायक रहे पिता सिबगतुल्लाह अंसारी की जगह टिकट दिया गया था। मन्नू अंसारी का मुकाबला बीजेपी के अलका राय से है। गौरतलब है कि सिबगतुल्लाह ने पहले इस सीट से पर्चा भर भी दिया था, लेकिन बाद में सपा नेतृत्व ने उनके बेटे को चुनाव लड़ाने का फरमान दे दिया और सिबगतुल्लाह ने पर्चा वापस ले लिया।