जिला पंचायत की राजनीति में भाजपा ने रालोद के सहारे अपनी नैया पार लगा ली। भारतीय जनता पार्टी के लिए इसे बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, रालोद भी भाजपा की जीत का सारथी बनकर जिले में अपनी साख बचाने में सफल रही।
जिला पंचायत सदस्य निर्वाचन के गणित पर नजर डालें तो भाजपा को 38 वार्ड में से सिर्फ आठ वार्ड में ही कामयाबी मिली थी। पूर्व मंत्री चौैधरी लक्ष्मीनारायण के भतीजे नरदेव चौधरी की जीत ने भाजपा का आंकड़ा आठ से बढ़ाकर नौ कर दिया। हालांकि, भाजपा ने नरदेव चौधरी के खिलाफ भी उम्मीदवार उतारा था। जिला पंचायत के सदस्यों की यह संख्या जिले में तीसरे नंबर की थी। इस दौरान बसपा सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर आई।
12 वार्ड में बसपा समर्थित उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। दूसरे स्थान पर जिला पंचायत में सत्ताधारी दल रालोद था। रालोद समर्थित 9 सदस्यों ने जीत दर्ज की थी लेकिन रालोद के अध्यक्ष पद के दो दिग्गज दावेदारों की हार ने पार्टी का गणित बिगाड़ दिया। ऐसे में पूर्व मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने भाजपा के तीसरे नंबर की पार्टी होने के बावजूद जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर जीत दर्ज करने के लिए रालोद से गठबंधन कराने में सफलता हासिल की।
इसी गठबंधन के चलते भाजपा उम्मीदवार के समर्थकों की संख्या 9 से बढ़कर 18 हो गई जो जीत के आंकड़े से सिर्फ दो कदम पीछे रही। इस दूरी को निर्दलीय सदस्यों ने खत्म करते हुए भाजपा की जीत दर्ज करा दी। जिला पंचायत में आए इस परिणाम से जहां भाजपा गदगद है तो रालोद नेता भी गठबंधन साथी होने के साथ अपनी जीत मान रहे हैं।