जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कामयाबी ने भाजपा की राजनीतिक ताकत और बढ़ा दी है। बीते तीन साल का रिकार्ड उठाकर देखें तो जिला पंचायत की जीत को भाजपा की ताकत में बड़े इजाफे के रूप में देखा जा रहा है।
कभी निकाय से लेकर संसदीय सीट तक काबिज रहने वाली भाजपा बीते दो दशक से जिले की राजनीति में हासिये पर आ गई थी। अब स्थितियां एक बार फिर करवट लेती नजर आ रही है। वर्ष 2012 में हुए निकाय चुनावों में जिले की सभी नगर पालिकाओं के साथ अधिकांश नगर पंचायतों पर भी भाजपा ने जीत दर्ज की।
इसके बाद 2014 के संसदीय चुनाव में कामयाबी का एक और कदम बढ़ा दिया। संसदीय चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में सिने तारिका हेमामालिनी ने जीत दर्ज की। पिछले तीन चुनाव में संसदीय क्षेत्र से निरंतर हार देख रहे भाजपा के लिए यह एक और बड़ी कामयाबी थी। मथुरा संसदीय क्षेत्र से लगातार तीन बार की जीत हासिल करने वाले तेजवीर सिंह की हार के बाद भाजपा का एक बार फिर मथुरा संसदीय क्षेत्र पर 2014 में कब्जा हुआ।
निकाय और संसदीय क्षेत्र पर काबिज होने के बाद जिले की राजनीति में गुरुवार को भाजपा ने एक और कदम आगे बढ़ा दिया है। जिला पंचातय की जीत को भाजपा के लिए एक बड़ी ताकत के रूप में देखा जा रहा है। इसे 2017 में होने जा रहे प्रदेश विधानसभा के चुनाव के लिए बड़ा टॉनिक माना जा रहा है। पार्टी की इस बड़ी जीत ने भाजपा जिला इकाई का भी कद बढ़ा दिया है।