योगगुरु बाबा रामदेव का मानना है कि सियासत की गंदगी को योग से दूर किया जा सकता है क्योंकि योग ही एक मात्र ऐसा साधन है जो तन और मन दोनों के विकारों को दूर करता है। पवित्र मन और चरित्र का निर्माण होता है। जब सभी पवित्र हो जाएंगे तो सियासत की गंदगी खुद ही दूर हो जाएगी।
बुधवार को महावन के रमणरेती आश्रम में अमर उजाला से खास बातचीत में बाबा रामदेव ने कहा, मैं योग गुरु हूं। सियासत का गुरु नहीं। लेकिन एक आम नागरिक की तरह समाज और देश की भलाई चाहता हूं। अच्छे लोग राजनीति में आएंगे तो सबको अच्छा लगेगा। बाबा रामदेव का कहना था कि सियासत में जो गंदगी की बात हो रही है उसको भी योग के माध्यम से ही दूर किया जा सकता है। योग करने वाले का मन बदल जाता है। सामाजिक कार्यों की तरफ जुड़ाव होने लगता है।
एक सवाल के जवाब में बाबा ने कहा कि यूपी की सियासत में उन्हें मत ले जाइए। बड़ी टेंशन है। उन्हें तो इस बारे में कुछ कहना ही नहीं है। वैसे भी संत किसी एक के नहीं होते बल्कि सभी को अपना मानते हैं। सभी से मिलना-जुलना भी रहता है। लिहाजा उन्हें किसी पार्टी या दल से नहीं जोड़ा जा सकता। हां इतना जरूर है कि व्यक्तिगत रूप से कोई किसी का समर्थन कर सकता है। हो सकता है कि किसी की नीतियां मुझे अच्छी लगें तो किसी की दूसरे को।
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बारे में जब उनसे पूछा गया तो बोले, देखिए मेरा तो नाम ही राम है। फिर राम मंदिर के बारे में क्या कहूं। जरा सा कुछ कहने लगो तो सियासत शुरू हो जाती है। योग गुुरु ने कहा कि अब जनता बहुत जागरूक है। कौन उसके लिए क्या कर रहा है सब जानते हैं। ढिंडोरा पीटने की कोई जरूरत ही नहीं है। अब लोग विकास चाहते हैं। शांति पसंद करते हैं। हर तरफ प्रेम भाव देखना चाहते हैं।
बोले, संतों के तो बड़े मोटे मोटे पेट
मथुरा। रमणरेती आश्रम पहुंचे बाबा रामदेव से संतों ने मुलाकात की। बाबा रामदेव ने सभी को योग के बारे में बताया। कहा कि संतों को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए। कई संतों के पेट इतने मोटे हैं कि वह चल फिर भी नहीं पा रहे हैं। वह खुद तो योग करें ही दूसरों को भी सिखाएं। आश्रम में आने वाले छात्रों को भी योग पढ़ाया जाए।