ब्रज क्षेत्र में कामां का गांव राधानगरी सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बना हुआ है। मुस्लिम बहुल इस गांव में होली का त्योहार सभी मिलकर मनाते हैं। गांव की गलियों में चौपाई गाते हैं, एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं और फिर गुंजिया की मिठास भाईचारे की इबारत लिखती है।
राजनीति भले ही हिंदू और मुसलमानों के बीच खाई को चौड़ा कर रही हो लेकिन राधानगरी गांव का सांप्रदायिक सौहार्द इस खाई को झुठला रहा है। बरसाना से पांच किलोमीटर दूर भरतपुर जिले के कामां तहसील के अंतर्गत राधानगरी गांव आता है।
गांव वासी सूबेदार ने कहा कि हमारे गांव का नाम राधा नगरी है। यह सोचकर हम मुसलमान भाई गर्व महसूस करते हैं। जहां एक ओर देश-विदेश के लोग राधा-कृष्ण के नाम के पीछे ब्रजभूमि आते हैं, उस नाम के गांव में हमारा जन्म सौभाग्य की बात है।
इशाक खान ने कहा कि हमारे गांव में हिंदू और मुस्लिमों के बीच हमेशा सौहार्द कायम रहता है। आज भी हम अपने सदियों पुरानी परंपरा का निर्वाह करते आ रहे हैं। विजय सिंह ने बताया कि होली पर मुस्लिम समुदाय के लोग चौपाई गाते और नाचते हुए गांव में होली मनाते आए हैं।
महमूद, जमीर खान, डा. जमशेद, ठाकुर भीम सिंह, मदन लाल, मानसिंह, उप सरपंच विक्रम सिंह, लाखन सिंह, मोहन सिंह, दिगंबर सिंह, ओमप्रकाश सिंह ने इस मौके पर आपस में जमकर होली खेली।
इसलिए पड़ा राधानगरी नाम
मान्यता है कि भरतपुर जिले के काम्यवन में भोजन थाली नामक स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण गाय चराने जाया करते थे। बरसाना से श्री राधा रानी उनके लिए खाना लेकर जाती थी। रास्ते में नदी के किनारे बैठकर वो एक-दूसरे से मिला करते थे। यहां भगवान ने राधा के साथ रंगों की होली भी खेली थी। तभी से इस गांव का नाम राधानगरी पड़ा।