यमुना का प्राचीन केशीघाट मंगलवार की शाम रोशनी से नहा उठा। अपने जीवन के सूनेपन को भरने के लिए वृंदावन में रहकर प्रभु भक्ति कर रही निराश्रित एवं विधवा महिलाओं ने यहां यमुना में दीपदान कर दीपावली महोत्सव मनाया।
नन्हे दीपों की रोशनी से कुछ समय के लिए ही सही जीवन में सूनेपन का अहसास जाता रहा।
स्वयंसेवी संगठन सुलभ इंटरनेशनल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वृंदावन की करीब एक हजार से ज्यादा विधवाओं ने मिट्टी के दीप रोशन किए। फुलझड़ियां भी जलाईं, हां पटाखे नहीं फोड़े।
नई साड़ी पहनकर केशीघाट पहुंची इन विधवाओं के चेहरे की झुर्रियों के बीच से दीपोत्सव मनाने की खुशी सहज देखी जा सकती थी। उत्साह यूं कि नन्हे दीपों को रोशन कर जैसे जीवन में खुशियां सहेज रही हों। आयोजन से पहले उन्होंने दीपोत्सव के लिए खरीदारी भी की।
कार्यक्रम के तहत विधवाओं के निवास स्थान वृंदावन के आश्रय सदनों को भी रंग-बिरंगी विद्युत झालरों और दीपों से सजाया गया। महिलाओं ने पुराना पागल बाबा स्थित मीरा सहभागिनी आश्रय सदन में फूलों की रंगोली भी सजाई। यहां भजन गाए गए, नृत्य भी किया गया।
सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डाक्टर बिंदेश्वर पाठक ने बताया कि विधवाओं की अंधेरी जिंदगी में रोशनी फैलाने के उद्देश्य से खासतौर पर उनके लिए इस उत्सव का आयोजन किया गया।
इस प्रकार के आयोजनों से महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। इस अवसर पर कमिश्नर प्रदीप भटनागर की पत्नी संगीता भटनागर, डीपीओ ओपी यादव आदि भी उपस्थित रहे।