फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विधवाओं ने खेली राधा-कृष्ण के स्वरूपों संग होली

Mon, 25 Mar 2013 10:48 AM IST
वृंदावन/अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
अध्यात्म की नगरी में इस बार की होली अद्भुत और अनुकरणीय थी। अभिशप्त जीवन जीने वाली विधवाओं के प्रति स्थापित परंपरागत नजरिए को तोड़ने की पहल इस नगर से हुई थी। अमूमन ऐसा होता नहीं कि विधवाएं रास-रंग, उत्सव-उल्लास का हिस्सा बनें लेकिन बांके बिहारी की नगरी इस बार होली पर एक नई परंपरा का सृजन हुआ। आश्रय सदनों में रहने वाली विधवाओं और निराश्रित महिलाओं ने अपने कन्हाई के साथ होली खेली।
विज्ञापन


श्रीधाम वृंदावन में वर्तमान में सैकड़ों विधवाएं रहती हैं। इनमें तमाम वे महिलाएं हैं, जो कहीं न कहीं परिवार से तिरस्कृत होकर बांके बिहारी की शरण में आईं। वह यहां गुमनामी की जिंदगी बसर करने को मजबूर हैं। ऐसी महिलाओं को उमंग और उल्लास की धारा से जोड़ने का बीड़ा सुलभ इंटरनेशनल ने उठाया।

संगठन ने एकांकी जीवन जी रहीं विधवाओं को ठाकुर जी में रमने का अवसर प्रदान करने की ठानी। इसी प्रयास के अंतर्गत रविवार को पुराना पागल बाबा मीरा सहभागिनी महिला आश्रय सदन में फूलों और गुलाल का होली खेली गई। महोत्सव में पहले रासलीला हुई।
विज्ञापन


इसमें सदन में रह रहीं विधवाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। महिलाओं ने राधा-कृष्ण के युगल स्वरूपों के संग होली खेली। इस होली आयोजन की खासियत यह रही कि इसमें भक्त और भगवान दोनों की भूमिका इन्हीं महिलाआ ने अदा की। सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वरी पाठक ने आशा जताई कि यह धार्मिक आयोजन महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा।

अद्भुत अनुभव थी रासलीला
महिला आश्रय सदन में वर्षों से रह रहीं कोलकाता की 62 वर्षीया भारती मंडल ने बताया कि जीवन में यह अपनी तरह का पहला आध्यात्मिक अनुभव था। उन्हें लगा कि उनकी जिंदगी के भी कुछ मायने हैं। भगवान ही उनके आश्रय हैं और नित नए रूपों में उनसे जुड़ना आध्यात्मिक आयामों के शिखर पर पहुंच जाने जैसा है।

अभूतपूर्व था कृष्ण का किरदार
पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले की रहने वाली 65 वर्षीया दयावंती ने कहा कि उन्होंने बताया कि इस अद्भुत होली रासलीला में कृष्ण का किरदार निभाना उनके जीवन का अभूतपूर्व पल था। उन्होंने बताया कि वैसे तो हर बार वह अपने तरीके से होली खेलती थीं किंतु इस बार एक नए आध्यात्मिक अंदाज में होली के आयोजन ने उन्हें कट चुकी दुनिया के फिर से करीब ला दिया है।

ऊर्जा देते हैं ऐसे आयोजन
कोलकाता की रहने वाली 58 वर्षीय सुभद्रा ने कहा कि उनके जीवन के मायने कृष्ण के प्रति प्रेम की एक और अभिव्यक्ति ने बदल दिए हैं। वह चाहतीं हैं कि इस तरह के समाज से जोड़ने वाले अध्यात्मिक कार्यक्रम हों, इसकी अनुभूति उन्हें उर्जावान बना देती है।

अपने जीवन के सूने पन को भरने के लिए वृंदावन में रह कर प्रभु भक्ति कर रहीं निराश्रित विधवाओं ने रविवार को होली के रंग में रंगकर आध्यात्मिक ऊर्जा और आनंद का अनुभव किया। आश्रय सदनों में विधवा महिलाओं ने अपने प्रिय श्रीकृष्ण के स्वरूपों के साथ गुलाल और फूलों से होली खेली। जब उनकी श्वेत साड़ियों को राधाकृष्ण के स्वरूपों ने रंग और गुलाल उड़ाकर भिगोया, तो उनकी पथराई आंखों में सहजता से ही प्रभु प्रेम में डूबे आंसू निकल पड़े।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें