मथुरा। पंचायत राज विभाग में डीपीआरओ किरन चौधरी की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। अब अपर जिला परियोजना प्रबंधक (एडीपीएम) से चार्ज हटाया गया तो वह लंबी छुट्टी पर चले गए। अब एडीपीएम का चार्ज स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के एक जिला समन्वयक को दिया गया है। कुछ लोग इसे ठीक बता रहे हैं तो कुछ नियम विरुद्ध होने की बात कह रहे हैं। बृहस्पतिवार को दिन भर विकास भवन में इसकी चर्चा रही।
ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना से लेकर ऑनलाइन भुगतान की प्रणाली लागू होने के बाद पंचायत राज विभाग में जिला परियोजना प्रबंधक और अपर जिला परियोजना प्रबंधक के पद सृजित किए गए थे। इन पदों पर सेवा प्रदाता कंपनी का चयन कर सीधे शासन ने ही तैनाती की थी। मथुरा में जिला परियोजना प्रबंधक का पद खाली पड़ा है, वहीं अपर जिला परियोजना प्रबंधक के पद पर राजेश सोलंकी की तैनाती है। ग्राम पंचायतों के डिजिटल हस्ताक्षर को सक्रिय, निष्क्रिय करना, ऑनलाइन भुगतान संबंधी समस्याओं का निराकरण, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज पोर्टल पर योजनाओं की मॉनीटरिंग का जिम्मा एडीपीएम का ही है।
4 फरवरी को डीपीआरओ किरन चौधरी को विजिलेंस ने गिरफ्तार किया था, इसके बाद अब परियोजना निदेशक डीआरडीए अरुण कुमार उपाध्याय को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कार्यभार संभालने के बाद एडीपीएम का चार्ज हटा दिया है। अब ये जिम्मेदारी स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में कार्यरत जिला समन्वयक शेखर कुमार को दी गई है। इसके बाद एडीपीएम लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। उनसे बात करने का भी काफी प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हुआ।
डीसी को चार्ज देने की रही चर्चा
बृहस्पतिवार को विकास भवन में एडीपीएम का चार्ज स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के डीसी (जिला समन्वयक) को देने की चर्चा रही। सूत्रों के अनुसार डीसी और एडीपीएम के पदीय दायित्व अलग-अलग हैं। विभाग द्वारा उनकी तैनाती भी अलग-अलग माध्यम से की गई है। ऐसे में ये नियम विरुद्ध है। वहीं मामले में जब डीपीआरओ अरुण कुमार उपाध्याय से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कार्यहित में उन्होंने कुछ निर्णय लिए हैं, अगर ये नियम के अनुरूप नहीं है तो इसकी जानकारी कर सुधार किया जाएगा।