मथुरा। रोडवेज बसों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीट का लाभ महिलाओं को नहीं मिलता है। फिर चाहे बस में भीड़ ही क्यों ना हो। महिला सीट पर बैठा व्यक्ति उठता नहीं है। न ही परिचालक पुरुषों को उठाने की जहमत दिखाते हैं। ये हाल बृहस्पतिवार की पड़ताल में भी सामने आया।
केस वन
पुराने बस स्टैंड पर दोपहर 2:30 बजे बरेली डिपो की बस संख्या यूपी 78 एलएन 6118 खचाखच भरी थी। गेट के पास एक परिवार ने बस को रोका। उसमें हाथरस जाने के लिए सवारियां चढ़ीं। परिवार में दो महिलाएं थीं। बस में बैठने के लिए जगह नहीं मिली तो परिचालक जो कि खुद महिला थी। उन्होंने कहा कुछ देर के बाद बस में जगह हो जाएगी। पीछे भी सवारियां अधिक होने के कारण परिवार को बस से उतरना पड़ा।
केस टू
राजस्थान के अजमेर डिपो की बस संख्या आरजे शून्य एक पीए 6779 में अलीगढ़ जाने के लिए तीन महिलाएं दोपहर 2:45 बजे बस में सवार हुई थीं। तीनों महिलाओं को बस में आरक्षित सीटों पर बैठने को नहीं मिला। जबकि महिला आरक्षित सीटों पर पुरुष बैठे थे। न चाहते हुए भी महिलाओं को बस की पीछे वाली सीटों पर बैठना पड़ा।
केवल नाम के लिए ही बसाें में आरक्षित सीट बना दी गई हैं, उन सीटों पर बैठे पुरुषों को कोई उठाता नहीं है और न ही पुरुष सीटों से उठते हैं। जहां जगह मिल जाती है बैठ जाते हैं
मंजू शर्मा
महिला यात्री
कई बार परिचालक की सीट पर बैठकर यात्रा की है। सीट खाली नहीं मिलने पर कभी कभी उतर जाते हैं। नहीं तो पीछे सीटों पर बैठना पड़ता है। ब्रेकर आने पर बहुत धक्के लगते हैं।
सीमा सिंह
महिला यात्री