मथुरा।सात जुलाई से सहालग शुरू होकर 15 जुलाई को खत्म होंगे। तीन माह से ठप पड़े पायल, साड़ी कारोबार को इस सहालग से काफी उम्मीदें थीं। मगर, महंगाई के कारण सहालग वाले घर के लोगों को छोड़ अन्य लोग खरीदारी से कतरा रहे हैं। चांदी के भाव 92 हजार के पार पहुंचने पर लोग शादी में कन्यादान में देने के लिए पायल व सोने के जेवरात की खरीद से दूरी बना रहे हैं।
मथुरा साड़ी उद्योग के संरक्षक राजेश बजाज ने बताया कि एक तो जुलाई माह में सहालग कम है। हाल में ही चुनाव खत्म हुए हैं। मानसून आने से लोगों के कामकाज प्रभावित हो गए हैं। इसके चलते इस बार सहालगों को देखते हुए उप्र सहित मप्र, राजस्थान, बिहार, झारखंड से भी कम ऑर्डर साड़ियों के प्राप्त हो रहे हैं। वहीं, इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजेंद्र कुमार अग्रवाल हाथी वाला ने बताया कि तेजी के चलते लोग पायल नहीं खरीद रहे हैं। दाम गिरने का इंतजार कर रहे हैं। करीब 80 प्रतिशत तक कारोबार प्रभावित हुआ है। मथुरा में प्रतिदिन करीब 3 टन चांदी की खपत होती है। कच्चे-पक्के माल का कारोबार करीब 27 से 30 करोड़ के बीच का रहता है।
मगर, बीते दो माह में चांदी की कीमतों में 20 हजार रुपये की तेजी प्रति किलोग्राम पर आई है। इस तेजी के कारण मथुरा के चांदी पायल निर्माताओं को बाहर से ऑर्डर कम ही मिल रहे हैं। वहीं, नेशन चैंबर एंड कॉमर्स इंडस्ट्री एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष अमित जैन ने बताया कि सात से 15 जुलाई तक के बीच सहालग हैं। अंदेशा है कि इस दौरान करीब शादी-समारोह से 50 करोड़ रुपये का व्यापार होगा। होटल, कैटर्स, बैंड-बाजा की बुकिंग व कपड़ा, सराफा, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटो मोबाइल सेक्टर में जरूरत के अनुसार तो लोग खरीदारी करेंगे ही।
घोड़ा बग्गी की ''''लगाम'''' नहीं नगर निगम के हाथ
मथुरा। नगर निगम में एक भी घोड़ा बग्गी और भैंसा बग्गी का पंजीकरण नहीं है। जबकि शादियों के सीजन में सड़क पर बरात में प्रतिदिन दर्जनों घोड़ा बग्गी नजर आती हैं। 7 जुलाई से फिर से सहालगों की शुरुआत होने जा रही है। लोगों जानकारी के अभाव में बिना लाइसेंस संचालित घोड़ा बग्गी बुक कर रहे हैं। नगर निगम भी इस पर खामोश बैठा हुआ है।
नगर निगम के क्षेत्र में चलने वाली घोड़ा बग्गी और भैंसा बुग्गी का लाइसेंस लेना पड़ता है। निगम इसका शुल्क लेता है। बाकायदा निगम कार्यालय में इसका पंजीकरण रजिस्टर होता है। मगर, वर्तमान में नगर निगम के चार जोन में से किसी में भी एक भी घोड़ा बग्गी का लाइसेंस नहीं है। नगर निगम ने भी इस ओर ध्यान देना बंद कर दिया। जबकि एक दशक पहले तक घोड़ा और भैंसा बग्गी का चिन्हीकरण किया जाता था। इनको लाइसेंस जारी किया जाता था। नगर निगम को लाइसेंस फीस के तौर पर राजस्व प्राप्त होता था। मगर, इस प्रक्रिया को नगर निगम ने भुला दिया है।
10-15 हजार रुपये तक में हो रही घोड़ा बग्गी की बुकिंग
सहालगों की शुरूआत होने को है। ऐसे में दूल्हा पक्ष बारात के लिए घोड़ा बग्गी की भी बुकिंग बैंड-बाजों के साथ कर रहे हैं। अधिकांश घोड़ा-बग्गी बैंड-बाजा पार्टी संचालकों के पास ही हैं। एक बारात के लिए घोड़ा-बग्गी की बुकिंग सजावट के आधार पर 10 से 15 हजार रुपये तक में हो रही है।
घोड़ा व भैंसा बग्गी का अभी कोई भी पंजीकरण नगर निगम कार्यालय में नहीं है। इनको चिन्हित कर लाइसेंस दिया जाएगा। लोगों से भी अपील है कि वह बारात के लिए घोड़ा बग्गी बुक करते समय लाइसेंस दिखाने की मांग अवश्य करें।
- शशांक चौधरी, नगर आयुक्त