मथुरा। गिरते भूगर्भ जल संचयन के लिए नगर निगम और विकास प्राधिकरण ने ताकत झोंक दी है। नगर निगम इसके लिए सवा चार करोड़ रुपये वाटर हार्वेस्टिंग योजना पर व्यय करने जा रहा है, वहीं मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) 100 विभिन्न सरकारी कार्यालयों की छत पर जल संचयन की तैयारी में जुट गया है। डीएम नवनीत सिंह चहल ने जल संचयन के लिए विभागों को ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिगत जल स्रोतों के अत्यधिक दोहन से स्थिति भयावह होती चली जा रही है। गर्मी के दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी इलाकों में भी पेयजल की किल्लत बढ़ने लगी है। इसी के चलते बारिश के दिनों में जल संचयन को लेकर नगर निगम ने चार करोड़ 22 लाख 98 हजार रुपये से निगम क्षेत्र के 59 स्थानों पर शासन के जल बचत अभियान के तहत विभिन्न कार्य स्वीकृत किए हैं।
नगर आयुक्त अनुनय झा ने बताया कि भूगर्भ जल संचयन की गंभीरता को देखते हुए पार्क, गोशाला और विभिन्न स्कूलों के पास वाटर हार्वेस्टिंग की योजना बनाई जा रही है, वहीं 30 स्थानों पर वाटर रिचार्ज पिट बनाए जाएंगे। आजकल में इन कार्यों की निविदा प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। नगर आयुक्त ने बताया कि इन कार्यों के संपादित हो जाने से काफी तादाद में बारिश का जल संरक्षित किया जा सकेगा, इससे वाटर लेबिल बढ़ेगा। निगम के कार्यालय में भी वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की जा रही है।
एमवीडीए के उपाध्यक्ष नगेंद्र प्रताप ने बताया कि इसी माह कराए गए सर्वे के आधार पर 92 सरकारी भवनों की छत पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया जाएगा। एमवीडीए की तकनीक से संबंधित विभाग अपने खर्चे पर इस सिस्टम का निर्माण करेंगे। प्रदेश के मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया जाए।
एमवीडीए कलक्ट्रेट, विकास भवन व ब्रज तीर्थ विकास परिषद के कराए जा रहे निर्माण स्थलों पर भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवा रहा है। सभी बिल्डरों से मल्टीस्टोरी भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए कहा है। कहा कि 300 मीटर और उससे अधिक वाले भवन का नक्शा स्वीकृति के वक्त रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की बाध्यता रहती है।