मथुरा। वृंदावन के भजन गायक बाबा रसिका पागल की मौत को हत्या का रूप देकर उनके शिष्य विष्णु बावरा ने चित्र बिहारी दास, विचित्र बिहारी दास और मोहिनी शरण के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की विवेचना कर फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी। पुलिस की फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ विष्णु बावरा ने सीजेएम के यहां रिट पिटीशन दाखिल की थी। कोर्ट ने उसकी रिट को खारिज कर पुलिस की विवेचना स्वीकार कर विष्णु बावरा के खिलाफ 182 की कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
वृंदावन कोतवाली प्रभारी रवि त्यागी ने बताया कि विख्यात संत भजन गायक रसिका पागल की 4 दिसंबर 2021 को बीमारी के चलते मौत हो गई थी। मौत के 3 साल बाद भजन गायक के शिष्य विष्णु बावरा ने चित्र बिहारी दास, विचित्र बिहारी दास और मोहिनी शरण पर दवा का ओवरडोज देकर हत्या का आरोप लगाते हुए कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच की तो जानकारी हुई कि भजन गायक काफी समय से मधुमेह की बीमारी थी। इस कारण उनकी किडनी खराब हो चुकी थी। उनका कई अस्पतालों में इलाज भी चला।
विवेचना में सभी आरोप झूठे निकले तो पुलिस ने कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी। पुलिस की फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ विष्णु बावरा ने सीजेएम के यहां गलत विवेचना करने का आरोप लगाते हुए रिट पिटीशन दाखिल की। कोर्ट ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान वादी कोर्ट में ऐसा कोई साक्ष्य और गवाह उपलब्ध नहीं दे सका जो पुलिस की विवेचना को झूठा साबित कर सकता था। इस पर कोर्ट ने पुलिस की विवेचना को सही मानते हुए वादी पर झूठा मुकदमा दर्ज करने पर धारा 182 की चालानी रिपोर्ट को दर्ज रजिस्टर करने के आदेश दिए हैं। साथ ही विष्णु बावरा को 18 मार्च 2025 को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है।