मथुरा। विकास भवन में कूड़ा जलाए जाने के मामले की जांच करने बृहस्पतिवार को प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की टीम पहुंची। कर्मचारियों के बयानों के आधार पर कूड़ा जलाने की घटना को महज एक दुर्घटना मानते हुए टीम वापस लौट आई।
17 मार्च को विकास भवन में एक बड़े कूड़े के ढेर में यहां तैनात कर्मचारियों ने आग लगा दी थी। कूड़े में धधकी आग से दो पेड़ भी सुलग गए थे। इसमें एक पेड़ पूरी तरह जल गया है, वहीं दूसरा बच गया। 18 मार्च के अंक में अमर उजाला न प्रमुखता से इसे प्रकाशित किया था। खबर का संज्ञान लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम बृहस्पतिवार शाम को विकास भवन में जांच करने पहुंची। टीम में शामिल जूनियर रिसर्च फेलो हर्ष और जितेंद्र ने यहां पहुंचकर जानकारी जुटाई। कूड़ा जलाने के स्थल का जायजा लेने के साथ जले हुए पेड़ को भी देखा। ये देखकर इस बात की तो पुष्टि हो गई, कि कूड़े में आग लगी थी।
कूड़े में आग कैसे लगी इसकी जानकारी के लिए टीम ने कर्मचारियों से जानकारी जुटाई। विकास भवन के कर्मचारियों ने कूड़ा जलाने की पुष्टि नहीं की। सभी ने सिगरेट या बीड़ी फेंक देने से आग लगने की आशंका जताई। इसके बाद टीम भी इसे दुर्घटना मानकर वापस लौट आई।
वर्जन
जांच के लिए टीम गई थी। टीम को विकास भवन में जला हुआ कूड़ा और पेड़ मिला। कर्मचारियों के बयान के आधार पर कूड़ा जलाया नहीं गया, बल्कि अज्ञात कारण से आग लग गई। दोबारा कूड़ा एकत्रित न होने देने के लिए विकास भवन के कर्मचारियों को कहा गया है।
-पंकज यादव, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मथुरा।