चौमुहां। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) द्वारा 100 करोड़ रुपये के कथित निवेश घोटाले में कर्मभूमि रियल एस्टेट कंपनी लिमिटेड के निदेशक महिपाल सिंह की गिरफ्तारी के बाद मामले से जुड़े कई नए तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियां कंपनी के कारोबार, निदेशकों की भूमिका और निवेशकों से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, छटीकरा निवासी महिपाल सिंह ने अलीगढ़ के कारोबारी डीपी सिंह के साथ मिलकर रियल एस्टेट कंपनी बनाकर अपना कारोबार बढ़ाया था। कंपनी में महिपाल सिंह के चचेरे भाई और उनकी पत्नी भी निदेशक रहे थे। बाद में दोनों दंपती ने कंपनी से इस्तीफा दे दिया था, जबकि अन्य निदेशक कंपनी के संचालन से जुड़े रहे।
वर्ष 2008 के आसपास महिपाल सिंह और उनके परिजन की भूमि सनसिटी हाईटेक कंपनी द्वारा खरीदे जाने के बाद उनके रियल एस्टेट कारोबार को नई गति मिली। इसके बाद कंपनी ने प्रदेश के कई जिलों में शाखाएं खोलकर निवेश योजनाओं का विस्तार किया। जांच में सामने आया है कि महिपाल सिंह की चचेरे भाई जेके राणा की एक कंपनी कल्पतरू में भी सहभागिता बताई जाती है, जिसकी जांच एजेंसियां कर रही हैं।
कंपनी की योजनाओं में निवेश करने वालों में मथुरा निवासी कई सेवानिवृत्त और सेवारत फौजी भी शामिल बताए जाते हैं। आरोप है कि उनके भी लाखों रुपये कंपनी में फंसे थे। पीड़ित निवेशक लंबे समय तक अपने धन का हिसाब-किताब लेने और रकम वापस पाने के लिए महिपाल सिंह के संपर्क में रहने का प्रयास करते रहे, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता था।
शनिवार को ईओडब्ल्यू की कानपुर इकाई ने महिपाल सिंह को मथुरा से गिरफ्तार कर लिया। मामले में नामजद अन्य पांच आरोपियों की तलाश जारी है। जांच एजेंसी अब कंपनी के वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी गहनता से जांच कर रही है।