उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान मथुरा स्ववित्त पोषित योजना के सहारे अपना अस्तित्व बचा रही है। राज्य सरकार ने नवीन कालेजों के संचालन से मुंह मोड़ लिया है।
प्रदेश के एक मात्र वेटरिनरी विवि में सरकारी अनुदान से सिर्फ वेटरिनरी कालेज संचालित है। करीब 14 साल पहले स्थापित हुए इस विवि में चार अन्य कालेजों का संचालन करना राज्य सरकार भूल गई है। बार-बार आग्रह के बाद भी नवीन कालेजों के लिए पद स्थापन की स्वीकृति राज्य सरकार से नहीं मिल पा रही है।
ऐसे में अस्तित्व को जिंदा रखने के लिए विवि प्रशासन सेल्फ फाइनेंस स्कीमों के माध्यम से कालेज ऑफ बायोटेक का संचालन कर रहा है। इसमें स्नातक और स्नातकोत्तर कोर्स चलाए जा रहे हैं लेकिन सेल्फ फाइनेंस स्कीम में अधिक फीस होने के कारण अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। सेल्फ फाइनेंस स्कीम में ही विवि ने डिप्लोमा कोर्सेज भी शुरू किए हैं।
हालांकि डिप्लोमा कोर्स कालेज ऑफ वेटरिनरी साइंस का ही हिस्सा हैं लेकिन इनकी फीस भी अधिक है। राज्य सरकार के अधीन वेटरिनरी विवि होने के बावजूद छात्रों को कोर्सेज के लिए प्राइवेट शिक्षण संस्थानों की भांति भारी भरकम फीस अदा करनी पड़ रही है।
राज्य सरकार को बार-बार चार नए कालेजों में पद सृजन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति एक विभाग से दूसरे विभाग तक सीमित होकर रह गई है। मुख्य सचिव और कृषि उत्पादन आयुक्त के निर्देश होने के बाद भी नए कालेजों के संचालन में सफलता नहीं मिल पा रही है।
प्रो. एसी वार्ष्णेय, कुलपति
वेटरिनरी विवि, मथुरा