बाजार में आई में दिल्ली नंबर की गाड़ी।
वृंदावन। भीड़ और अव्यवस्थित यातायात से राहत दिलाने के लिए पुलिस ने 25 दिसंबर से पांच जनवरी तक बाहरी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध के आदेश तो जारी कर दिए लेकिन यह फैसला जमीन पर लागू होता नजर नहीं आया। आदेश के अगले दिन मखौल उड़ गया। रोक केवल कागजों में सिमट कर रह गई जबकि सड़कों पर बाहरी गाड़ियां बेधड़क दौड़ती रहीं।
वृंदावन की कुंजगलियों में बाहरी वाहनों की कतारें लगी रहीं। बांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र, गोपीनाथ बाजार, निधिवन मार्ग और आसपास की संकरी गलियों में भी हालात ऐसे बने कि पैदल चलना तक मुश्किल हो गया। पुलिस का दावा था कि बाहरी वाहनों पर रोक लगाकर भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था को सुचारु किया जाएगा। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई। पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए लेकिन किसी ने नियमों का पालन सही तरीके से नहीं कराया।
नतीजा यह रहा कि बाहरी गाड़ियां शहर के अंदर भी नजर आईं लेकिन न तो प्रभावी बैरिकेडिंग दिखी और न ही सख्त चेकिंग। कई प्रवेश मार्गों से बाहरी गाड़ियां बिना किसी रोकटोक के भीतर तक पहुंचती रहीं जिससे पूरे दिन अफरा तफरी का माहौल बना रहा। स्थानीय लोगों को इससे काफी परेशानी हुई।