जिले में यूरिया के लिए मारामारी मची हुई है। स्थिति इस कदर गंभीर है कि न तो सहकारी समितियों पर खाद मिल रही है न खुले बाजार में निर्धारित दरों पर दुकानदार दे रहे हैं।
किसान आशंकित हैं कि कहीं आगे भी यही स्थिति रही तो फसल के लिए संकट खड़ा हो सकता है। इस कारण वे अभी से ही पूरी फसल के लिए खाद की खरीद कर रहे हैं। इसका लाख खुला बाजार उठा रहा है। दुकानों पर खुलेआम खाद की ब्लैक में बिक्री की जा रही है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कृषि अधिकारियों ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है।
23 दिसंबर को चौधरी चरण सिंह के जन्मदिवस पर आयोजित कृषि मेला में भी खाद को लेकर किसानों ने सीडीओ के समक्ष हंगामा किया था। इसके बावजूद कृषि विभाग ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है। आए दिन सहकारी समितियों पर खाद की बिक्री को लेकर हंगामे की सूचनाएं आ रही हैं।