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UP Budget 2025: मथुरा को बड़ी सौगात, बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर के लिए 150 करोड़ का एलान; जानें क्या-क्या मिला

Thu, 20 Feb 2025 12:58 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

UP Budget 2025: योगी सरकार ने मथुरा के लिए अपना पिटारा खोल दिया है। सरकार के 9वें बजट में मथुरा-वृंदावन कॉरिडोर के लिए 150 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया गया है।
 
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up budget - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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UP Budget 2025: अयोध्या-काशी के बाद कान्हा की नगरी में कॉरिडोर बनने की कवायद तेज हो गई है। बृहस्पतिवार को विधानसभा में पेश बजट में कॉरिडोर निर्माण के लिए 150 करोड़ रुपये बजट का प्रावधान किया गया है। इसमें 100 करोड़ भूमि अधिग्रहण व 50 करोड़ रुपये से भव्य निर्माण होगा।
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भव्यता ऐसी होगी कि बिहारीजी के भक्त अपलक निहारते रह जाएंगे। कॉरिडोर में ज्यों-ज्यों भक्त मंदिर की सीढ़ियां चढ़ते जाएंगे, उनकी बिहारीजी से मिलन की जिज्ञासा और बढ़ती जाएगी। यहां सुविधाएं भी बेहतर होंगी। कदंब तो कहीं करील के पौधे कॉरिडोर की खूबसूरती को और चार चांद लगाएंगे। 

कॉरिडोर प्रांगण में ठा. श्रीबांकेबिहारी जी से पहले राधागोपाल, राधाबिहारी और केशव-जू सहित गौड़िया मठ का अद्भुत आकर्षण भक्तों के लिए मनोहारी छटा बिखेरने वाला होगा। इतना ही नहीं, प्रस्तावित कॉरिडोर में भक्तों के बैठने के लिए विशाल प्रतीक्षालय, सामान व जूता घर के साथ पेयजल और चिकित्सा सेवा सहित शिशु देखभाल की व्यवस्था का भी प्रावधान है। 
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वर्तमान में वृंदावन में ठा. श्रीबांकेबिहारी के दर्शन के वक्त भक्तों को जिन कष्टों का सामना करना पड़ रहा है, कॉरिडोर बनने के बाद इससे निजात मिलेगी। इससे श्रीबांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र की संपूर्ण आभा ही बदल देगा।

पांच एकड़ में प्रस्तावित किए गए कॉरिडोर के प्लान में भक्तों की सुविधाओं का हर दृष्टि से ख्याल रखा गया है। वर्तमान संकरी गलियों के स्थान पर तीन ओर से चौड़े रास्ते भक्तों को मंदिर तक पहुंचाएंगे। यह तीनों ही रास्ते कॉरिडोर से जुड़े गए हैं। 

ठा. श्रीबांकेबिहारी मंदिर सहित संपूर्ण कॉरिडोर को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। इसमें एक हिस्सा मंदिर का है तो बाकी दो हिस्सा कॉरिडोर में भक्तों की सुख सुविधाओं से जुड़े हैं।

पांच एकड़ में प्रस्तावित है कॉरिडोर
पांच एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित बिहारीजी कॉरिडोर के साथ ही इस दायरे के अत्यंत निकट स्थापित प्राचीन मंदिर श्रीमदन मोहन और श्री राधावल्लभ भी ठा. श्रीबांकेबिहारी के भक्तों के निकट आ जाएंगे। भव्य कॉरिडोर के दोनों किनारे यह विशाल मंदिर भी भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनेंगे, जहां वर्तमान में बहुत कम श्रद्धालु पहुंचते हैं। यह दोनों ही मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन संरक्षित हैं।

निर्माण के बाद सुगम रास्ते से होंगे दर्शन
कॉरिडोर अमल में आने के बाद ठा. श्रीबांकेबिहारी की प्राकट्य स्थली निधिवन भक्तों के और निकट हो जाएगी। बिहारीजी के दर्शन के बाद भक्तजन सुगम रास्तों से सहज ही निधिवन और सेवा कुंज तक पहुंच सकेंगे। यह दोनों ही स्थल वृंदावन के मध्य अभी भी प्राचीनता को समेटे हुए हैं, जहां सिर्फ लता-पताओं का जंगल है।

ये होंगी सुविधाएं
मंदिर तक पहुंचने से पहले कॉरिडोर के दोनों हिस्सों में भक्तों के लिए मुहैया कराए जाने वाली सुविधाओं पर नजर डालें तो बड़ा खुला स्थान रखा गया है। सामान घर और जूता घर के साथ प्रसाधन और पेयजल की व्यवस्था का भी प्रावधान है। प्रांगण में ही चिकित्सा सेवा और शिशु देखभाल के लिए भी व्यवस्था की गई है। मंदिर में भीड़ होने पर भक्तों के लिए विशाल प्रतीक्षालय भी बनेगा।

मंदिर के पहुंच मार्ग
-विद्यापीठ चौराहा से पुलिस चौकी होते हुए वर्तमान रास्ता।
-परिक्रमा से वीआईपी मार्ग होते हुए मंदिर तक वर्तमान रास्ता।
-जुगलघाट से राधा वल्लभमंदिर मार्ग होते हुए नवीन रास्ता।

बिहारी जी कॉरिडोर के तीन हिस्से
ठा. श्रीबांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र और उसकी परिक्रमा।
10600 -वर्ग मीटर में कॉरिडोर का ऊपरी हिस्सा।
11300-वर्ग मीटर में कॉरिडोर का निचला हिस्सा।

एक साथ चार मंदिरों के होंगे दर्शन
वृंदावन में प्रस्तावित कॉरिडोर प्रांगण में भक्तजन ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के साथ चार और प्राचीन मंदिरों के दर्शन कर सकेंगे। इसमें राधा गोपाल मंदिर, राधा बिहारी मंदिर और केशव जू मंदिर सहित गौड़िया मठ भी शामिल होगा। कॉरिडोर में इन मंदिरों के प्राचीन स्वरूप के साथ ही भव्यता प्रदान की जाएगी।

एक साथ 10 हजार श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन
कॉरिडोर बनने के बाद 10 हजार श्रद्धालु एक साथ दर्शन कर सकेंगे। इसके निर्माण के लिए करीब 276 से अधिक दुकान और मकानों का अधिग्रहण किया जाएगा। इसमें 149 आवासीय, 66 व्यावसायिक, 57 मिश्रित भवन हैं। इसके अलावा काशी में बने कॉरिडोर के आधार पर ही इसे विकसित किया जाएगा। कॉरिडोर के साथ ही श्रीबांकेबिहारी मंदिर के परिक्रमा मार्ग को भी नया स्वरूप दिया जाना है।
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