फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वृंदावन हादसे के बाद पड़ताल: बाइक का इंजन, अप्रशिक्षित कारीगर; दो लाख रुपये में तैयार हो रहीं मौत की मोटरबोट

Wed, 15 Apr 2026 09:42 AM IST
Dhirendra Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

मथुरा में यमुना नदी में चलने वाली नाव और मोटरबोट बिना किसी लाइसेंस और सुरक्षा मानकों के तैयार की जा रही हैं। घटिया सामग्री और बिना फिटनेस जांच के संचालन से श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
विज्ञापन
मोटरबोट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

यमुना नदी में चल रहीं नाव अकुशल कारीगरों द्वारा तैयार की जाती हैं। महज दो से ढाई लाख रुपये की कीमत में तैयार होने वाली इन नावों और मोटरबोट के निर्माण के लिए कारीगर न तो किसी संस्थान से प्रशिक्षित हैं न ही उन्हें इस कार्य के लिए किसी लाइसेंस की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि यमुना में पर्यटकों व श्रद्धालुओं के सैर-सपाटे के लिए इस्तेमाल होने वाली नाव और मोटरबोट सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर तैयार की जाती हैं। कारीगरों को तो बस ऑर्डर दो और अपने मनमुताबिक नाव या मोटरबोट आपको 15 दिन बाद तैयार मिल जाएगी।
विज्ञापन

ध्रुव घाट के निकट नाव, मोटरबोट व चप्पू बनाने वाली एक वर्कशॉप की पड़ताल की गई तो चौंकाने वाली जानकारी मिली। इन नावों का निर्माण पूरी तरह से ग्राहकों की मांग पर निर्भर है। बोट की क्षमता कितनी होगी, उसमें इंजन कौन सा लगेगा और उसकी डिजाइन कैसी होगी, यह सब खरीदार तय करता है। वर्कशाप में पर्यटकों को लुभाने के लिए डबल स्टोरी (दो मंजिला) बोट की मांग बढ़ी है, जिसकी कीमत 2.50 लाख रुपये है। इसमें बुलेट बाइक का इंजन लगाया जाता है। वहीं सिंगल स्टोर वाली मोटरबोट में छोटी बाइकों के इंजन फिट किए जाते हैं।

इसी जगह संचालित दूसरी वर्कशॉप में चप्पू वाली नावें तैयार की जा रही थीं। वर्कशॉप संचालक ने बताया कि नाव का बेस, मॉडल, चप्पू, लाइटिंग और बैठने की गद्देदार सीटों के अलग-अलग रेट हैं। जबकि डबल स्टोरी मोटरबोट ऑर्डर पर बनाई जाती है। वहीं डबल स्टोरी मोटरबोट में झूला आदि लगाने के अतिरिक्त दाम हैं।

 

नहीं कराई जाती फिटनेस
नाव या मोटरबोट को पानी में उतारने से पहले उसका स्ट्रक्चरल ऑडिट और जल पुलिस या संबंधित विभाग से फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य है। अवैध रूप से बनने वाली नावों का कोई पंजीकरण नहीं होता। घटिया क्वालिटी के फाइबर और लोहे का इस्तेमाल इनकी मजबूती पर सवालिया निशान खड़ा करता है।
 
विज्ञापन

बैठक करेंगे निगम के अधिकारी
नावों में सुरक्षा मानकों पर चर्चा के लिए नगर निगम के अधिकारी बृहस्पतिवार को नाविकों के साथ बैठक करेंगे। इसमें उनकी समस्याओं को भी सुना जाएगा। हालांकि प्रशासन ने नाविकों को निर्देश दिए हैं कि वह नाव में 10 से ज्यादा यात्रियों को न बैठाएं। लाइफ जैकेट का प्रयोग करें। नगर आयुक्त जग प्रवेश ने बताया कि सोमवार को हुई नाव सुरक्षा एवं नाविक कल्याण समिति की बैठक में कई बिंदुओं पर निर्णय लिए गए हैं। जल्दी ही इन्हें लागू किया जाएगा। नावों का निर्माण करने वाले कारीगरों के भी लाइसेंस जांचे जाएंगे।

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें