यमुना में डूबे पंकज का 5वें दिन भी पता नहीं लगा पाया है। केसी घाट से गोकुल बैराज तक ड्रोन कैमरे से लेकर स्टीमर तक यमुना में पंकज मल्होत्रा की तलाश में जुटे रहे लेकिन उनके बारे में कुछ पता नहीं चला। 150 लोगों की 40 टीमें घाटों के हर कोने में गईं, बैराज पर जाल भी बांधा गया। पांचवे दिन जांच का पांच किमी का दायरे भी बढ़ाया गया।
सीओ मांट संदीप सिंह ने बताया कि यमुना में हुए नाव हादसे में अब तक 14 लोगों के शव बरामद कर लिए गए गए हैं लेकिन पंकज मल्होत्रा के बारे में अभी तक सुराग नहीं लग पाया है। मंगलवार को सुबह छह बजे सर्च ऑपरेशन शुरू हो गया। एक साथ सातों जोन में अभियान चलाया गया। ड्रोन कैमरे से भी नजर रखी गई लेकिन कोई सफलता नहीं मिल पाई। गोकुल बैराज पर जाल लगाया गया ताकि पंकज आगे नहीं जा सके लेकिन उसके बारे में मंगलवार तक पता नहीं चल पाया।
एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, फ्लड पीएसी, स्थानीय नाविक और गोताखोरों की 40 टीमें इस ऑपरेशन में जुटीं हुईं। सुबह से रात तक बचाव दल के लोग यमुना में नाव लेकर दौड़ते रहे। इन सभी की प्रशासन की तरफ से भोजन, नाश्ता पानी आदि मुहैया कराया जा रहा है। टीम के हर अधिकारी, कर्मचारी की मंशा है कि पंकज की जल्द तलाश कर लें।
पिता का रो-रोकर बुरा हाल पंकज के पिता सुखदेव राज को रो-रोकर बुरा हाल है। कभी इस घाट तो कभी दूसरे घाट पर पहुंच जाते हैं। जब भी कोई बचाव दल नाव लेकर किनारे आता हैं तो वह उससे पूछते हैं कि पंकज मिला क्या। कहते हैं ठाकुरजी को उससे क्या नाराजगी है। उसने तो किसी का बुरा भी नहीं किया। वह सभी का आदर-सम्मान करता था, आध्यात्मिक रुचि उसे यहां तक खींच लाई। क्या अब वह उन्हें कभी देखने को नहीं मिलेगा।