फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूजीसी: सुप्रीम कोर्ट ने कायम रखा सामाजिक सद्भाव

विज्ञापन
विज्ञापन
मथुरा। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर अंतरिम रोक लगाने के फैसले से खुशी की लहर है। शहर के सवर्ण समाज से जुड़े लोगों ने इसे सामाजिक सद्भाव को कायम रखने वाला फैसला बताया है।
विज्ञापन

सवर्ण संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि यूजीसी के नए नियम अस्पष्ट और भेदभावपूर्ण थे, जिनसे उच्च शिक्षा व्यवस्था में असमानता बढ़ने की आशंका थी। इन नियमों के खिलाफ पहले भी विभिन्न संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए गए थे और जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे गए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सवर्ण समाज के लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की और इसे समाज की बड़ी जीत बताया। इस दौरान संगठनों के पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की कि शिक्षा से जुड़े किसी भी कानून को लागू करने से पहले सभी वर्गों से संवाद किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो।


यूजीसी के नियमों में स्पष्टता का अभाव है और इनके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने नियमों पर अंतरिम रोक लगाते हुए मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की है।
विज्ञापन

-प्रदीप शर्मा, अध्यक्ष, पूर्व बार एसोसिएशन



यह फैसला शिक्षा में समान अवसर की रक्षा करने वाला है। यूजीसी के नए नियम छात्रों को वर्गों में बांटने वाले थे। इससे शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो सकता था। छात्रों में ऊंच-नीच की भावना पैदा होती। इससे स्कूल-कॉलेजों का माहौल तो खराब होता छात्रों के भविष्य पर भी संकट मंडराने लगता।
रोहित जादौन, पूर्व अध्यक्ष, छात्र संघ


यह भारत के सभी समाज के लिए एक स्वागत योग्य कदम है, क्योंकि इस कानून का सदुपयोग से ज्यादा दुरुपयोग होने की पूरी संभावना थी। इस कानून के तहत स्वर्ण समाज के छात्रों और अध्यापकों पर बिना किसी वजह के आरोप लगाए जा सकते थे और आरोप लगाने वाले से कोई जवाबदेही तय नहीं थी।
राजेश बजाज, पूर्व अध्यक्ष, नेशनल चैंबर

यूजीसी कानून पर शीर्ष अदालत ने रोक लगाकर समाज में संभावित विघटन को रोकने का काम किया है। शिक्षा क्षेत्र में इस कानून से कई सारी विसंगतियां पैदा होतीं। 21वीं सदी में इस तरह के कानून के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
किशोरी अग्रवाल,

जब-जब भी बड़े संकट आए हैं, शीर्ष अदालत ने देश को राह दिखाई है। यूजीसी कानून समाज में खाई पैदा करने वाला था। इससे लोगों में दुर्भावना का संचार होता। स्वागतयोग्य कदम है।
विज्ञापन

रश्मि बंसल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें