मथुरा। जिन १३ आईटीआई के खिलाफ शासन का फर्जी पत्र हाईकोर्ट में पेश करने के मामले में एफआईआर हुई है, उनमें से तीन शिक्षण संस्थाएं कागजों में चल रहीं थीं। वह शिक्षण संस्थाएं मौके से नदारद हैं। इस प्रकार की रिपोर्ट शासन को भी भेजी गई है। यह शिक्षण संस्थाएं पांच वर्ष से लाखों की छात्रवृत्ति प्राप्त कर चुके हैं।
आईटीआई के खिलाफ शासन स्तर से होने वाली जांच से बचने के लिए हाईकोर्ट में शासन का एक पत्र पेश किया गया, जिसमें इस जांच को न करने के लिए कहा गया था लेकिन जब हाईकोर्ट ने इस संबंध में शासन से पूछा तो उसने मना कर दिया।
शासन द्वारा इस पत्र को फर्जी बताया गया। इस पत्र को लेकर हाईकोर्ट जाने वाली १३ शिक्षण संस्थाओं के खिलाफ चार दिन पूर्व थाना सदर बाजार में रिपोर्ट दर्ज हुई है। इन्हीं १३ शिक्षण संस्थाओं मेें से ३ शिक्षण संस्थाएं एसडीएम को जांच में मौके पर मिली हीं नहीं। यह रिपोर्ट भी शासन को जा चुकी है।
एक विद्यालय के संचालक ने बनाया था दबाव
अपने आईटीआई कॉलेज के छात्रों की छात्रवृत्ति का डाटा फारवर्ड करने के लिए दो सप्ताह पूर्व समाज कल्याण विभाग में पहुंचकर अधिकारी तथा स्टाफ पर दबंगई दिखाने वाले विद्यालय संचालक इन्हीं १३ विद्यालयों में से एक विद्यालय के संचालक थे। उनके द्वारा अपने कई विद्यालयों के छात्रों का डाटा फारवर्डिंग करने के लिए दबाव बनाया गया था।
छात्रों को भेजकर बनाया जा रहा माहौल
समाज कल्याण विभाग द्वारा पर्याप्त समय दिए जाने के बाद भी विभाग को आवश्यक जानकारी न देने वाले छात्र अब कुछ छात्रों को समाज कल्याण विभाग में भेजकर माहौल तैयार कर रहे हैं, ताकि शासन स्तर से छात्रवृत्ति के डाटा को फिर से भेजा जा सके।
कुछ शिक्षण संस्थाओं की भौतिक रिपोर्ट नकारात्मक आई थी। हम उन पर नजर रखे हैं। जिन विद्यालय संचालक द्वारा डाटा फॉरवर्ड करने के लिए दबाव बनाया गया था। उस संबंध में डीएम द्वारा रिपोर्ट दर्ज करने के लिए निर्देशित किया गया है।
-महेंद्र प्रसाद नाथ सिंह, कार्यकारी समाज कल्याण अधिकारी