मथुरा। कारोबारियों का मानना है कि मथुरा में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) की बाध्यताओं के बीच व्हाइट कैटेगरी के उद्योगों की संख्या बढ़ाने को शुभ संकेत मानते हैं। उद्यमियों की टीस है कि उद्योगों के लिए बिजली, पानी, सड़क की मूलभूत आवश्यकताएं, अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जैसे प्रक्रियाओं के सरलीकरण से उद्योगों को गति मिल सकेगी।
व्हाइट कैटेगरी के उद्योगों में इजाफा करने से निश्चय ही नए उद्योगों को लगाने के लिए उद्यमी आगे आएंगे, लेकिन अब भी औद्योगिक गलियारों की समस्याएं जस की तस हैं। होना तो यह चाहिए कि हर इंडस्ट्री के लिए अलग से जमीन दी जाए, उसमें निर्बाध बिजली, स्वच्छ पानी और सब्सिडी पर बिजली, गैस की उपलब्धता हो। कॉमन एसटीपी प्लांट्स हों। प्रदूषण फैलाना कोई नहीं चाहता है, लेकिन निदान के उपाय भी मिलकर करने होंगे। - राहुल अग्रवाल, उद्यमी
मथुरा में औद्योगिक विकास का दायरा सिमटा नहीं रहे। यहां के उद्यमी टीटीजेड की बाध्यता के कारण हरियाणा, मानेसर, नोएडा और राजस्थान की ओर जा रहे हैं। इस पलायन को रोकने के लिए प्रभावी कदम तो उठाने होंगे। यहां तमाम प्रोजेक्ट केवल एनओसी के लिए लटके पड़े हैं। ऐसे में कुछ नए उद्योगों को हरी झंडी मिलने से बहार नहीं आने वाली है। सरकार की उदारशील नीतियों के बाद भी उद्यमियों की समस्याओं को बहुत तवज्जो नहीं मिल पा रही है। विकास के लिए जरूरी है कि सभी मिलकर प्रयास करें। मथुरा में अपार संभावनाएं हैं।- विशाल बंसल, उद्यमी
टीटीजेड की काफी चीजें बदलते वक्त के साथ बदली हैं। जिस तरह से तकनीकी बदलाव हुआ है, उसी तरह से टीटीजेड के नियम और शर्तों में भी बदलाव की महती आवश्यकता है। आगरा की अलग बात है मगर मथुरा में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए जरूरत है। व्हाइट कैटेगरी में रियायत से कितना फायदा मिलता है, यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल तो उद्यमियों की मूलभूत जरूरतें पूरी होनी चाहिए। बदलते परिवेश में कई रियायतों की उम्मीद उद्योग जगत सरकार से कर रहा है। - संजय जिंदल, कारोबारी
हमारी तो बरसों पुरानी एक ही मांग है कि मथुरा के चहुंमुखी विकास के लिए टीटीजेड के नियमों का मथुरा को लेकर दोबारा सर्वे किया जाए। हालांकि मथुरा के कई उद्योगों को व्हाइट कैटेगरी का फायदा मिलने जा रहा है। औद्योगिक एरिया की सड़कों तक की हालत खराब है। उद्योग बंधु में उठाई जाने वाली समस्याओं का निदान भी त्वरित नहीं हो पा रहा है। उद्योगों के मथुरा से पलायन को रोकने के लिए अतिरिक्त रियायतों की दरकार है। - राजेश बजाज, पूर्व अध्यक्ष, नेशनल चैंबर