प्रदेश के कई शहरों में फिर से कोरोना ने दस्तक दे दी है। कोरोना मरीजों को अलग वार्ड में शिफ्ट किया जाता है, लेकिन जिला अस्पताल में कोविड के मरीजों के लिए बने वार्ड में ताला लगा है। अगर कोई व्यक्ति कोविड पॉजिटिव आ जाता है तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पास भर्ती के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
प्रदेश में कोरोना को देखते हुए कई जिलों के अस्पताल में बचाव के लिए संसाधनों और वार्डों में सुधार कार्य चालू भी कर दिए हैं, लेकिन जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को विभाग के आदेश का इंतजार है। जिला अस्पताल में पूर्व ट्राॅमा सेंटर में बने कोविड वार्ड में ताला लटका है, वहां आईसीयू वार्ड चालू होना था लेकिन अभी तक नहीं हुआ। यहां बने कोविड सैंपल केंद्र में कबाड़ भरा है और हर जगह गंदगी फैली है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोविड का कोई नया मरीज निकलता है तो उसे कहां भर्ती किया जाएगा।
ऑक्सीजन की व्यवस्था
कोरोना के मरीजों को सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है। दूसरी और तीसरी लहर में ऑक्सीजन सिलिंडर की किल्लत रही थी। ऐसे में कई कोरोना मरीजों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिली थी। हालांकि जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगा है। इस प्लांट से प्रति मिनट 760 लीटर ऑक्सीजन सप्लाई होती है।
वहीं महिला अस्पताल में प्रति मिनट एक हजार लीटर ऑक्सीजन सप्लाई होती है। वहीं, महिला और जिला अस्पताल में प्रतिदिन विभिन्न बीमारियों से पीड़ित मरीज आ रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा किसी भी मरीज को मास्क लगाना अनिवार्य नहीं किया है। इससे खतरा बढ़ने की संभावना ज्यादा है।
सीएमओ अजय कुमार वर्मा ने बताया कि अभी स्वास्थ्य विभाग से कोरोना के लिए कोई एडवाइजरी नहीं आई है। अगर ऐसा कोई आदेश आएगा तो व्यवस्थाएं कराई जाएंगी। हालांकि अपने स्तर से व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने की कवायद चल रही है।