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Mathura News: दस हजार किमी सफर करके जोधपुर झाल पहुंचा नीलकंठी

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जोधपुर झाल में मौजूद पक्षी नीलकंठी। 
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फरह (मथुरा)। जोधपुर झाल में साइबेरिया, अलास्का और उत्तरी चीन में पाए जाने वाले पक्षी नीलकंठी ने भी यहां अपना डेरा डाल दिया है।
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केवल दस ग्राम वजनी व 12 से 14 सेमी आकार का यह पक्षी 10 हजार किमी का सफर तय कर हर साल सर्दियों में मथुरा प्रवास पर आता है। नीलकंठी को अंग्रेजी में ब्लूथ्रोट भी कहा जाता है।

आगरा विश्वविद्यालय की शोधार्थी निधि यादव ने बताया कि ब्लूथ्रोट की विश्वभर में 10 उप प्रजातियां पाई जाती हैं। यह पुरानी दुनिया के फ्लाईकैचर परिवार का गौरैया के समान पक्षी है। यह वेटलैंड और नमी वाले स्थान में पाया जाता है। बीआरडीएस संस्था के अब्दुल कलाम के अनुसार यह कीटभक्षी पैसराइन पक्षी है।
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बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसाइटी के पक्षी विशेषज्ञ डॉ केपी सिंह के अनुसार ब्लूथ्रोट का वैज्ञानिक नाम लुसिनिया स्वेसिका है। इस प्रजाति में नर के गले पर गहरी नीली पट्टी और लाल मेहरून रंग का धब्बा होता है। मादा के गले पर यह निशान हल्के रंग के होते हैं। यह पक्षी सेंट्रल एशियन फ्लाई से भारतीय उपमहाद्वीप मे प्रवेश करता है।
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