रमजान को लेकर घीयामंडी बाजार में खरीदारी करते लोग।
कोसीकलां। रमजान का पाक महीना बृहस्पतिवार से शुरू हो रहा है। इसे लेकर बुधवार की रात क्षेत्र की मस्जिदों को रोशनी से सजाया गया। वहीं अकीदतमंदों में उत्साह देखने को मिला। खराब मौसम के चलते कई स्थानों पर चांद देखने में दिक्कत आई। रमजान शुरू होते ही रोजों का सिलसिला शुरू होगा। पहले रोजे के लिए सहरी और इफ्तार की तैयारियां घर-घर में दिखाई दी। बाजारों में खजूर, सेवई, फल और रोजमर्रा की जरूरत के सामान की खरीदारी बढ़ गई है। मस्जिदों में रोजाना फज्र, जोहर, असर, मगरिब और ईशा की नमाज के साथ तरावीह का विशेष इंतजाम किया गया है।
सरायशाही मस्जिद के इमाम मौलाना जर्रार हुसैन ने बताया कि आसमान में बादल होने के कारण चांद दिखाई नही दिया। बरेली शहर में चांद दिखने के बाद बृहस्पतिवार को पहला रोजा रखा जाएगा। मौलाना ने बताया कि यह महीना इबादत, सब्र और इंसानियत का पैगाम देता है। रमजान सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है बल्कि अपने किरदार को बेहतर बनाने, बुराइयों से दूर रहने और जरूरतमंदों की मदद करने का महीना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वह रोजों के साथ-साथ नमाज, कुरआन की तिलावत और सदका-खैरात पर खास तवज्जो दें। वहीं मरकज इमाम मौलाना अकबर कासमी ने बताया रमजान का पाक महीना बृहस्पतिवार से शुरू होगा। ईदगाह कमेटी के हाजी साकिब, हाजी सादिक ने मरकज के इमाम अकबर कासमी जी को रमजान के चांद की मुबारक दी।
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लगभग 13 घंटे का रहेगा रोजा
रमजान के पूरे माह मुस्लिम समाज के लोग रोजा रखेंगे। सुबह लगभग 5:30 बजे तक सहरी का समय रहता है, जिसके बाद रोजे की शुरुआत हो जाती है। दिनभर करीब 13 घंटे तक खाने-पीने से परहेज किया जाता है। शाम लगभग 6:30 बजे मगरिब की अजान के साथ रोजा खोला जाता है, जिसे इफ्तार कहा जाता है। इस दौरान नमाज और इबादत का विशेष महत्व रहता है।