नंदगांव। ब्रज के अधिकांश मंदिरों में चार सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी, वहीं नंदबाबा के गांव नंदगांव में नंदलाला 5 सितंबर की आधी रात को जन्मेंगे। इसकी वजह है नंदगांव की अनूठी ‘खुर गिनती’ परंपरा। इसी के अनुसार नंदगांव में जन्माष्टमी की तारीख तय होती है।
नंदीश्वर पहाड़ी स्थित विश्व प्रसिद्ध नंदबाबा मंदिर में वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में रक्षाबंधन के बाद अंगुलियों पर आठ दिन गिने जाते हैं। इस गणना के बीच तिथि क्षय या वृद्धि होने पर जन्माष्टमी की तारीख भी बदल जाती है। यही कारण है कि नंदभवन की जन्माष्टमी कई बार ब्रज के दूसरे मंदिरों से अलग दिन पड़ती है। इस बार भी खुर गिनती के अनुसार 5 सितंबर को कान्हा के जन्म की बधाई नंदबाबा के आंगन में गूंजेगी। नंदगांव में जन्माष्टमी की रात भजन-संध्या के साथ ढांडी-ढांडन लीला होगी। इसमें श्रीकृष्ण के कुल का बखान किया जाएगा। आधी रात जन्म के समय नंदभवन में बधाइयां गूंजेंगी और श्रद्धालु कान्हा के जन्म के साक्षी बनेंगे।
छह सितंबर को शंकर लीला व मल्ल युद्ध
6 सितंबर को नंदोत्सव में नंदगांव की गलियों और नंदभवन का रंग ही अलग होगा। नंदगांव और बरसाना के गोस्वामी समाज द्वारा संयुक्त समाज गायन किया जाएगा। इसके अलावा दधि-कांधो, शंकरलीला, मल्लयुद्ध और बांस बधाई की परंपरा निभाई जाएगी। नंदबाबा मंदिर के सेवायत एवं पूर्व चेयरमैन तारा चंद गोस्वामी ने बताया कि दोनों दिन आयोजन परंपरागत रीति से होंगे।
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श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से है नंदगांव की पहचान
ब्रज की मान्यता के अनुसार मथुरा कारागार में जन्म के बाद वसुदेव श्रीकृष्ण को गोकुल ले गए थे। कंस के भय से नंदबाबा बाद में परिवार सहित नंदीश्वर पर्वत पर आकर बस गए। मान्यता है कि बालकृष्ण ने नंदगांव में करीब नौ वर्ष बिताए। इसीलिए यहां कृष्ण जन्माष्टमी महज एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि नंद के घर जन्मे उस लाला की स्मृति का उत्सव है, जिसकी बाल लीलाओं से नंदगांव की पहचान जुड़ी है। यही कारण है कि सदियों बाद भी नंदगांव ने जन्माष्टमी की तारीख तय करने की अपनी परंपरा को संभालकर रखा है।