जनरलगंज रोड के खाली प्लाॅट में फैले कचरे में विचरण करता गौवंश। संवाद
मथुरा। देश की स्वच्छता रैंकिंग में 11वां स्थान प्राप्त करने से उत्साहित नगर निगम की सफाई व्यवस्था लचर हो गई है। स्वच्छता अभियान भी मजाक बन गया है। कहीं कूड़े के ढेर तो कहीं अंबार लगे हुए हैं, वहीं खाली प्लॉटों को लोगों ने डलावघर बना दिया है। इसको लेकर लोगों ने निगम की कर्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि निगम अधिकारी गृह कर वसूलने में तो तत्पर रहते हैं, लेकिन कूड़ा प्रबंधन पर किसी का कोई ध्यान नहीं है।
लोगों का कहना है कि सरकार स्वच्छता पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन निगम की उदासीनता इस अभियान को पलीता लगा रही है। शहर के लक्ष्मीनगर, जयसिंहपुरा, वनखंडी, चौक बाजार समेत कई इलाकों में खाली प्लॉट कूड़ादान बन गए हैं। इसके अलावा शहर के कई पॉश इलाकों से लेकर घनी आबादी वाली बस्तियों तक में खाली प्लॉटों में यही हाल है। यहां प्लॉट डलावघर में तब्दील हो गए हैं। इससे न केवल बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है, बल्कि आवारा पशुओं का भी जमावड़ा लगा रहता है। निगम की इस लचर व्यवस्था से नाराज लोगों ने विभिन्न प्रतिक्रियां दी हैं। हालांकि कूड़ा उठाने से लेकर उसके निस्तारण तक एक मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था है, लेकिन इसके बावजूद शहर की सूरत धूमिल हो रही है। व्यापारी अखिलेश मिश्रा पिंटू का कहना है कि खाली प्लॉट
कूड़े से अटे पड़े हैं। सड़कों के किनारे भी गंदगी फैली रहती है।
क्या बोले लोग
निगम को केवल अपनी रैंकिंग दिखाई देती है, जबकि हकीकत में कोई खासा बदलाव नहीं आया है। खाली प्लॉट ही नहीं, बल्कि कई ऐसे स्थान हैं, जहां कूड़े का अंबार लगा रहता है। उधर न कोई सफाईकर्मी ध्यान देता है और न ही कोई अधिकारी।
आशीष अग्रवाल, निवासी राधापुरम कॉलोनी
कूड़ेदान होने के बाद भी लोग खाली प्लॉटों में कूड़ा फेंक रहे हैं। इससे पता चलता है कि निगम की सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें हैं। यह न सिर्फ स्वच्छता का मजाक है, बल्कि स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है।
नरेश शर्मा बब्बू, निवासी चौक बाजार