बरसाना। बरसाना की पावन भूमि पर स्थित 111 फीट ऊंचा कीर्ति जी का मंदिर आज अपने स्थापना दिवस के 7 वर्ष पूर्ण कर 8वें वर्ष में प्रवेश करने जा रहा है। इन सात वर्षों में यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि ब्रज संस्कृति, शिल्प और आस्था का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर अब बरसाना की पहचान बन चुका है।
नागर शैली में निर्मित कीर्ति मंदिर में नार्वे का ग्रेनाइट स्टोन, इटेलियन मार्बल और राजस्थान के वंशी पहाड़पुर के भूरे रंग के पत्थर पर इनले वर्क किया गया है। जगद्गुरु कृपालु महाराज द्वारा रचित प्रेमरस सिद्धांत और प्रेमरस मदिरा के पदों को भी मंदिर की दीवारों पर उकेरा गया है। गर्भगृह के प्रवेश द्वारों पर कल्पवृक्ष की आकृतियां हैं। गर्भगृह में विराजमान दायीं ओर श्री यादवेन्द्र सरकार मध्य में सिंहासन पर कीर्ति मां की गोद में बाल स्वरूप किशोरी जी और बांई ओर श्री राघवेन्द्र सरकार का आकर्षित श्री विग्रह एकदम जीवंत प्रतीत होते हैं।
रंगीली महल के संस्था सचिव नितिन गुप्ता ने बताया कि कीर्ति मंदिर की परिकल्पना जगद्गुरु कृपालु महाराज ने की थी। महाराज के गोलोकधाम चले जाने के बाद उनकी कल्पना को डॉ विशाखा त्रिपाठी, डॉ श्यामा त्रिपाठी और डॉ कृष्णा त्रिपाठी तीनों दीदियों ने मिलकर सात वर्ष पूर्व वसंत पंचमी के दिन पूरा किया।