मथुरा में समय रात एक बजे। जगह डैंपियर नगर का अहिल्याबाई चौक। सुनसान सड़क पर केवल बंदरों और कुत्तों का डेरा, जिनसे बचती हुई भयभीत एक किशोरी इधर से उधर घूम रही थी। उसे यह पता ही नहीं था कि कहां जाना है। वह तो बस आ गई थी परिजन से नाराज होकर, घर से ढाई सौ किमी दूर। रात में गश्त पर पहुंची पुलिस ने किशोरी को न केवल समझाया बल्कि उसे सुरक्षित घर पहुंचाया।
शुक्रवार देर रात को होटल हीरा क्रिस्टल के सामने से एक 15-16 वर्षीय किशोरी गुजर रही थी। रास्ते में बैठे कुत्तों और बंदरों से बचती हुई वह बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर जाने का प्रयास करने लगी, लेकिन वहां घुप अंधेरा देख वापस लौटने लगी। इसी बीच पीआरवी वहां पहुंची। डरी-सहमी अकेली किशोरी को देख पीआरवी कर्मी हेड कांस्टेबल नीरज कुमार ने उसे रोककर रात में अकेली निकलने का कारण पूछा तो पता चला कि वह अपना घर छोड़कर आई है।
उन्होंने किशोरी को स्नेहपूर्वक समझाया तो उसे मानो संबल मिला। सजल नयनों से उसने बताया कि वह घर से बिना बताए चली आई। उसके पास एक फूटी कौड़ी तक नहीं थी और न ही सामान। स्टेशन तक तो ट्रेन से आ गई पर यहां से पैदल आगे बढ़ी तो बंदरों ने उसका थैला छीन लिया। हेड कांस्टेबल नीरज कुमार ने किशोरी को आश्वासन दिया कि वह अब पूरी तरह से सुरक्षित है। किशोरी ने अपने पिता नंबर दिया और बताया कि वह भिंड, मध्य प्रदेश की रहने वाली है।
पुलिस ने पिता से बात की। उन्हें बताया कि आपकी बेटी सुरक्षित है। यह सुनकर उसके पिता की जान में जान आई। किशोरी को थाना कोतवाली पहुंचाया गया। यहां हेड कांस्टेबल अजय यादव व महिला कांस्टेबल अनामिका यादव ने उसे दिसाला दिया। सुबह करीब छह बजे किशोरी के पिता थाना कोतवाली पहुंचे और बेटी को अपनी सुपुर्दगी में लिया।